रेलवे भर्ती परीक्षा 2020

कुछ दिनों से आप सब युवाओं और छात्रों ने ट्विटर और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अभियान छेड़ रखा है, और कल भी 5 सिंतबर 5 बजे 5 मिन्ट के लिए आप सब युवाओं ने थाली ताली बजा कर अपना रोष प्रकट किया, आप के पास रोजगार नही है, सालों से आप सब परीक्षा दे कर बैठे हो पर सरकार है कि नतीजे घोषित करने को तैयार नही। और अब बिहार चुनाव नजदीक है तो रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अपने ट्वीटर हैंडल से ट्वीट कर जानकारी दियी है, की रेलवे में बम्पर भर्तियाँ खुल रही हैं आप के लिए वेसे ही जैसे 2017, 2018 और 2019 में खुली थी जिस का नतीजा आज तक सरकार घोषित नही कर पाई और कुछ की तो परीक्षा ही नही हो पाई है।

छात्र खाली रेलवे के लिए परेशान नही हैं वो छात्र भी परेशान है जिन्होंने SSC,CGL, Agriculture,Bank PO, लोको पायलट और भी ऐसे ही तमाम तरह की परीक्षाओं का परिणाम अब तक सरकार घोषित नहीं कर पाई है और न ही परीक्षा करा पाई है जो लगभग सालों से लंबित हैं और साथ ही सरकार सारे विभागों में पदों की कटौती कर रही है, जिस से आप पर और बेरोजगारी का बोझ बढ़ेगा, पर उस के बाद भी सरकार ने फैसला लिया है कि आगामी 15 दिसंबर को रेलवे की परीक्षा होनी है, यानी 2017 के परीक्षा के परिणाम 2020 तक नही आये हैं तो क्या जो परीक्षा 15 दिसंबर 2020 को होनी उस का परिणाम समय पर आ पायेगा, सायद नही, सरकार के लिए ये चुनावी प्रलोभन हो सकता है, पर हक़ीक़त में दूर दूर तक भी लगता नहीं कि युवाओं को जल्दी ही रोजगार मिलेगा।

क्योंकि सोचने वाली बात है मार्च 2019 में जो 90,000 भर्तियाँ रेलवे ने NTPC ग्रुप D की निकाली थी उस की परीक्षा अब 15 दिसंबर को होनी है, यानि 2020 पूरा निकल गया और अब ये 2021 में चली गयी हैं क्योंकि अगर दिसंबर 2020 में परीक्षा हो रही है तो नतीजे 2021 में ही आएंगे और कब तक आएंगे इस का कोई अनुमान नही है हो सकता है छात्रों को 2021 में भी पद की नियुक्ति न मिले। और न ही 2018 में लोकसभा चुनाव से पहले निकले लोको पायलट की नियुक्ति के कि लिये रेलमंत्री ने कोई आश्वासन दिया, जबकि छात्र परीक्षा पास कर चुके हैं, और उन छात्रों की सारी प्रकिया भी पूरी हो गयी है बस सरकार को कॉल लेटर दे कर ट्रेनिंग में भेजना है जब की सरकार उस के बारे में कुछ बता नही रही है,।

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने जो आंकड़े दिए हैं उनसे काफी जानकारी मिलती है, जिन तीन परीक्षाओं की तारीख की बात कही गई है उसमें 1 लाख 40 हज़ार से अधिक पद हैं. जिसके लिए 2 करोड़ 45 लाख छात्रों ने फार्म भरे थे. बोर्ड के चेयरमैन कोरोना का बहाना बता रहे थे जब कि दूसरी तरफ NEET और JEE जैसे परीक्षा कराई जा रही है, आप को याद दिला दूं कि रेलवे की नॉन टेक्निकल पोपुलर कैटगरी की परीक्षा का फार्म भरने का काम अप्रैल 2019 में पूरा हो चुका था. इस परीक्षा को जून से सितंबर 2019 के बीच होने का प्रस्ताव था, तब कोरोना पैदा भी नही हुआ था, फिर वह परीक्षा समय पर क्यों नहीं हुई ? 2019 के लोक सभा चुनाव से पहले 2018 में जो वेकेंसी आई थी तब भी नौजवानों ने करोड़ों फार्म भरे थे।

आज अगर सहायक लोको पायलट की परीक्षा पास कर घर बैठे बाकी छत्रों की नियुक्ति की तारीख़ का एलान होता तब कहा जा सकता था कि छात्रों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है, मगर आप ध्यान दे. रेलमंत्री के ट्वीट पर नियुक्ति की बात पर चुप्पी है. इसलिए यह अधूरी ही सफलता है. दूसरी अन्य परीक्षाओं के शामिल छात्रों के आश्वासन के लिए भी सरकार ने कुछ नहीं कहा, और वहीं बैंकिंग परीक्षा में सीटों की संख्या काफी घट चुकी है, वहाँ भी  रेलवे और SSC जैसा हाल है. इसलिए तारीख के एलान से यह न समझें कि रेलवे नियुक्ति को लेकर वचनबद्ध और प्रतिबद्ध है. 

अभी हाल की घटनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि सारे बेरोजगार छात्रों ने सरकार के विरोध में मोर्चा खोल दिया है तो हो सकता है सरकार ने इन छात्रों की एकता को तोड़ने के लिए रेलवे को परीक्षा का ऐलान किया हो ताकि बेरोजगार छात्र आपस में ही बंट जाए

मैं तो अब भी उन छात्रों से यही कहूंगा कि सरकार फिर से प्रोलोभन दे कर आपके भविष्य के साथ खेल रही है, आप अपनी हक़ की लड़ाई अपने संविधान के तहत जारी रखो ताकि सरकार रोजगार दिलाने के लिए आप छात्रों के आगे झुकने को मजबूर हो जाए, क्यों कि आप सब इस देश का भविष्य हो आप को ही तय करना है कि सरकार की बातों पर कब तक यकीन किया जाए क्योंकि की पिछले कुछ वर्षों का इतिहास देखा जाए तो सरकार रोजगार के मामलों नें नाकाम रही है

आप की खुशहाल भविष्य की शुभकामनाएं , मेहनत सफलता की कुंजी है मेहनत करते रहिए सफलता जरूर मिलेगी आज नही तो कल, बाकी सरकारें आएंगी जाएंगी आम नागरिक के पास ही देश चलाने की ताकत है, आप के एक वोट से सरकारें बनती और बिगड़ती है, आप मतदाता बाद में पहले एक अच्छे जागरूक नागरिक बनो तभी आप का भविष्य और देश का भविष्य खुशहाल रहेगा

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महिला सशक्तिकरण

एक दिन यूँ ही करिश्मा दीदी को पास वाले घर से जोर जोर से चिल्लाने की लड़ने की आवाज़ें सुनाई देती है, तो करिश्मा दीदी एक सभ्य समाज की जागरूक महिला होने के नाते चौंक पड़ती है, जहाँ आज कल अक्सर लोग दूसरे का झगड़ा समझ दूर भाग जाते हैं, इन घटनाओं पर ध्यान नही देते और फिर कुछ अप्रिय घटना घट जाती है

करिश्मा दीदी हिम्मत जुटा के उस घर की तरफ भागी जहाँ से वो लड़ने झगड़ने की आवाज़ आ रही थी, जैसे ही करिश्मा दीदी उस घर पर पहुँचती है तो सामने घर का दरवाजा खुला देख सन्न रह जाती है।

उनकी नज़र सामने एक महिला पर पड़ती है जो अपने अधखुले कपड़े सम्भालते हुए नहाने बैठी है, मुँह से खून निकल रहा है, बाल बिखरे हुए हैं, वो सहमी सकुचाई बैठी है, और कुछ इसी सभ्य समाज में जीने वाले लोग तमशाहीन बने खड़े हैं, ये उसी समाज के लोग हैं, जहां भगवान विष्णु को माँ सीता और माता द्रोपदी की रक्षा के लिए अवतरित होना पड़ा था ।

करिश्मा दीदी आनन फानन में दरवाजा बन्द करती है जैसे उस वक़्त मानो करिश्मा दीदी के ह्रदय में स्वयं भगवान कृष्ण एक महिला की रक्षा के लिए अवतरित हो गए हों , और फिर करिश्मा दीदी गुस्सा होते हुए उन सभ्य समाज के तमशाहीन लोगों को भगाती है, और उस पीड़ित महिला की पीड़ा में अपनी पीड़ा मिलाते हुए कहती है तुम लोग चले जाओ यहां से ये हमारे घर का मामला है, ये शब्द शायद करिश्मा दीदी के मुँह से सुन कर उस पीड़ित महिला को लगा होगा जहां एक ओर मेरे खुद का पति जिस के साथ सात जन्मों के फेरे लिए हैं जिस के लिए अपना सब कुछ छोड़ आई हूँ, जिस की खातिर दिन रात घर की दिनचर्या में लगी रहती हूँ, वो मेरे खुद का पति मुझ पर हाथ उठता है, हर रोज शराब पीकर आता है, न जाने कितने ही जुल्म मैं हर रोज सहती हूँ उस पति की लाज बचाने को अपने आप को भूल जाती हूँ पर वो मुझे समझ ही नही पाता, अपने खुद के घर को घर नही समझ पाता, जिस को बनाने के लिए मैं खुद के सपनो को दरकिनार कर देती हूँ, और वहीं दूसरी ओर एक पड़ोस की महिला करिश्मा दीदी आकर कहती है ये हमारे घर का मामला है। शायद उस महिला को करिश्मा दीदी ने ऊर्जावान कर दिया हो, क्योंकि मुँह से निकले मीठे बोल बड़े बड़े जख्म भर देते हैं, और करिष्मा दीदी एक जागरूक महिला का फर्ज निभाते हुए उस महिला की सासु माँ को फोन करती है….. कि आप के बेटे ने आपकी बहुँ पर हाथ उठाया है, तो सासु माँ का जवाब आता है ……मुझे इन से कोई लेना देना नही पति पत्नी का झगड़ा है ये दोनों जाने, मैंने पुलिस को फोन कर दिया है, और कुछ देर बाद पुलिस आ जाती है

करिष्मा दीदी सारी घटना पुलिस को बताती है, और पुलिस उस महिला के पति को थप्पड़ मार कर कहती है तुझे महिला पर हाथ उठाना आता है, और अपने साथ ले जाती है और वो पति जाते हुए कहता है करिश्मा मैं तुझे देख लूंगा,

और वो महिला वहीं पास में सिसक के रो रही है बच्चा भूखा है दूध के पैसे नही है, और करिश्मा दीदी कहती है पैसे की चिंता मत करना, मैंने अपने दूध वाले को बोल दिया वो आधा किलो दूध दे जाएगा, कुछ ही देर में दूध वाला अमूल की एक थैली दे जाता है, और करिश्मा दीदी घर लौट आती है,

 

अच्छे काम करने के लिए अच्छे नेता की जरूरत नही होती, और इस के लिए करिश्मा दीदी की मदद अतुलनीय है उन्होंने जो किया आज के दौर में बहुत कम लोग होते हैं जो किसी की मदद के लिए आगे आते हैं, पर मेरी नज़रों में अच्छा समाज और मूल अधिकारों के लिए अच्छे नेता अच्छे सरकार की जरूरत होती है, सरकार अपने फ़ायदे के लिए शराब की दुकानें खुलवा लेती है जिस की वजह से हर रोज न जाने कितने घर बर्बाद हो जाते हैं, हर रोज न जाने कितनी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हो जाता है, हर दिन कितने लोग उस ज़हर को पी कर शरीर त्याग देते हैं, पर हमारी सरकारें उन चीजों पर ध्यान नही देती,

उनसे अस्पताल नही खुलवाए जाते हैं, उनसे अच्छे स्कूल नही खुलवाएं जाते जहाँ एक अच्छा उपचार समय पर मिल सके, एक अच्छी शिक्षा बच्चों को मिल सके ताकि कोई बच्चा बड़ा होकर इस तरह से किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार न करे, महिलाओं की आजीविका के लिए सरकार कुछ नही करती, अगर महिला खुद सक्षम हो तो वो खुद कुछ न कुछ कर सकती है अपने लिए अपने बच्चो के लिए, माना कि आज करिश्मा दीदी ने दूध देकर मानवता का फर्ज निभाया, पर ये तो हर रोज होता रहेगा उस का पति जेल में घूस देकर बाहर आ जायेगा, वो फिर मारपीट करेगा, फिर कौन उस महिला के बच्चे को दूध देगा ? क्या सरकार महिलाओं को इतना शक्तिशाली नही बना सकती कि वो अपने खर्चे खुद चला सके ताकि वो शराबी पति हाथ उठाने से पहले दस बार सोचे, पर हमारे नेता, सरकार आपके उन जरूरतों के लिए कभी काम नही करेगी, मैं ये नही कह रहा उस का पति अच्छा है, हो सकता है उस के पास कोई छोटी मोटी कमाई भी न हो क्योंकि अक्सर लोग आर्थिक तंगी की वजह से इस तरह घर में लड़ाई झगड़ा करने लग जाते हैं, पर सरकार को क्या लेना देना आपको आर्थिक तंगी हो या कुछ और, वो बस हिन्दू मुस्लिम, मंदिर मस्जिद,जाति धर्म, अमीरी गरीबी, बेरोजगारी के नाम पर आपको उलझा के रखेगी, ताकि आप उन्ही चीजों में घिरकर फिर से सरकार को वोट दो,

सुना हौ मौजूदा सरकार खिलोनो के लिए करोड़ो रुपये की लागत में एक कारखाना खुलवाने जा रही है, बहुत अच्छी मुहिम है, हमारे देश में 70% बच्चे आज भी पत्थरों के खिलाने बनाकर दिल बहला लेते है, उनको शिक्षा नही मिलती, हर साल कुपोषण के कारण हज़ारो बच्चे मौत के मुँह में चले जाते हैं, काश हमारी सरकार हमारे नेता खिलौनों के साथ अच्छा स्कूल कम फीस में, एक अच्छा अस्पताल काम खर्चे वाला बना देती जहाँ हर वो इंसान जाकर अपनी शिक्षा और उपचार लेता, शायद देश में खिलौनों से ज्यादा शिक्षा और अस्पताल की जरूरत है

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Rose Day ! और एक निस्वार्थ प्रेम

 

सुबह की प्यारी किरणों ने धरा पर कदम रखा है, और ये मिट्टी की सोंधी खुशबू मधम मधम मेरी साँसों में घुल रही है, आज weekend है, आज ऑफिस की छुट्टी है, तो सोचा आज Gym करने के बाद थोड़ा टहल लूँ, तो कानों में Earphone लगा के कुछ गाने सुनते हुये टहल ही रहा था, की सामने इक कूड़ा घर जहाँ पर कॉलोनी का काफी कूड़ा हर रोज घरों से निकल कर जमा हो जाता उस में मेरी नज़र पड़ी,

आज देखा उस कूड़े को, वो आज खूबसूरत लग रहा था, आज उस कूड़े में थोड़ी खुशबू भी थी, जो शायद कल नही होती थी, मुझे थोड़ा अजीब लगा की आज ये सब क्यों? फ़िर याद आया की अच्छा कल Rose Day था , प्यार का दिन, किसी ने अपने खास शक्स को गुलाब दिये होंगे वो गुलाब सब आज उस कूड़े घर में थे, हाँ वही गुलाब जिन में कल बहुत सारी मोहब्बत लिपटी थी

आज वो सूख कर थोड़ा मुरझा गये थे, फ़िर नज़र मेरी वही पास में कुछ बच्चो में पड़ी जो शायद स्कूल जाने की उमर के थे, वो उस कूड़े में कूड़ा बिन रहे थे, फ़िर वही दूसरी तरफ़ कुछ लावारिश कुत्ते उस सड़े हुये कूड़े में से कुछ खा रहे थे, मुझे थोड़ा और अजीब लगा की क्या इनको प्यार की जरुरत नही होती ?, क्या इनका rose day नही होता ? क्या इन का valentine week नही होता?? मन में सोचा इक rose bouquet करीब 500-1000 रूपये का होता होगा, शायद वो पैसे इन बच्चों को दिये जाते तो शायद मोहब्बत अमर हो जाती, हाँ मोहब्बत तो दिल से होती है न? जैसे इक माँ अपने बच्चे से, जैसे भगवान अपने भक्त से, जैसे ये सूरज चांद इस धरती से, जैसे हवा पहाड़ पर्बत नदियाँ हम इन्सानो से करते हैं निस्वार्थ ही, बिना किसी लालच के, क्या इन्सान नही कर सकता ऐसी ही मोहब्बत?? वो क्यों गुलाबों से अपनी मोहब्बत दिखाता है??

 

काश इन्सान का दिल भी उन गुलाबों सा हो जाता खुद टूट कर किसी को महका देता, किसी जरुरत मंद को निस्वार्थ ही थोड़ी मोहब्बत दिखा देता, काश वो कूड़े बिनने वाले बच्चे स्कूल जा पाते उनके चेहरे पर थोड़ी सी मुस्कराहट आ पाती, काश वो लावारिश कुत्ते एक दिन कुछ अच्छा खा पाते, पर नही आज का इन्सान स्वार्थी हो चुका है, जहाँ उस को अपने लिये कुछ दिखता है वो वही अपनी मोहब्बत दिखता है,

एक दिन गुलाब देने से मोहब्बत परखी नही जाती, मोहब्बत करनी है हर रोज करो, उन से जिन्को कभी मोहब्बत मिली ही नही,

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लगा के टिका माथे पर हाथों में राखी जो सजाई है

क्या खूब बहन भाई की जोड़ी ऊपर वाले ने बनाई है

रक्षाबंधन की शुभकामनाएं ❤️
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मेरी बहन के होठों में मुस्कान यूँ बनी रहे
कामयाबी हो हर तरफ खुशियाँ भी घनी रहे

रक्षाबंधन की शुभकामनाएं 👫🏻
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सावन के महीने में ये रक्षाबंधन जो आया है

बाँधे राखी की डोर में खुशियाँ भी संग लाया है

रक्षाबंधन की शुभकामनाएं 💕
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राखी है डोर नाजुक सी प्यार से बाँध देना
हर जन्म में मेरे भाई तू बस मेरा साथ देना

रक्षाबंधन की शुभकामनाएं 👫🏻
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राखी के इन धागों में स्नेह का गांठ लगाएंगे

सूरज चाँद सितारों जैसे इस बंधन को निभाएंगे

Happy RakshaBandhan ❤️
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तेरी राखी बंधी होगी मेरी कलाई में
और नब्ज़ में रवानी होगी

तेरी हर ख़ुशी के लिए फिर चाहे
भाई को जान गवानी होगी

रक्षाबंधन की शुभकामनाएं 🎁
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भाई बहन का ये रिश्ता हम हर जन्म निभाएंगे

रोयेंगे साथ मिलकर और मिलकर इक दूजें को हँसाएंगे

रक्षाबंधन की शुभकामनाएं 👫🏻
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मेरी राखी जन्मों तक बंधी रहे तेरी कलाई में

तू खुश रहे यही दुआ है मेरी रक्षाबंधन की बधाई में

Happy Rakshabandhan 💕
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कैप्टेन मनोज पांडेय-कारगिल विजय दिवस

ये कहानी है सन 1975 की, उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के रुधा गावँ में एक बहुत ही गरीब परिवार में उस समय खुशियां दौड़ आती हैं, जब 25 जून 1975 को माँ मोहिनी और पिता गोपीचंद पांडेय के घर एक नन्हा बालक जन्म लेता है,पिता लखनऊ के हसनगंज चौराहे पर पान का की दुकान लगाया करते थे और माँ मोहनी घर का सारा काम संभालती थी, और उस बालक का नाम रखा जाता है “मनोज“, और मनोज की परवरिस भी वेसे ही होती है, जैसे आमतौर पर एक गरीब परिवार में होती है, जहाँ कुछ सपनें कभी पूरे नही होते तो कभी छोटी छोटी चीजों में भी खुशियां ढूंढ कर खुश हो लिया करते हैं,

बचपन

जब मनोज महज ढाई साल के थे वही किसी गावं के मेले में अपनी माँ से कहते है, माँ मुझे एक बाँसुरी दिला दे, शायद वो नन्हा बालक 2 रूपये की उस बाँसुरी में अपने खुशियों के सुर पिरोना चाहता हो, या फिर उस को अपने घर के हालात पता थे और 2 रुपये की बाँसुरी में अपना मन मार कर खुशियाँ ढूंढ लियी हों, माँ स्कूल से आने जाने के लिए रिक्शे के पैसे दिया करती थी पर मनोज चंद पैसे बचाने के लिए स्कूल से पैदल ही आया जाया करते थे, वो छोटे थे अपने परिवार के लिए कुछ कर नही सकते थे, पर कुछ छोटी छोटी चीजें कर के शायद अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

कुछ बच्चे होते हैं जो गरीबी में रहकर कुछ कर नही पाते, वो टूट जाते हैं,उनका बचपन बिखर जाता है, पर मनोज बचपन से ही कुछ करना चाहते थे, अपनी माँ से कहानियां सुना करते थे, और माँ हौसला बढ़ाया करती थी, और इन्ही कहानियों को सुन कर मनोज के अंदर देश भक्ति ऐसी जागी की वो हर पल यही बात बोलते की माँ मुझे भारतीय सेना में जाना है।

और इसी जज्बे के चलते वो पढ़ाई में ध्यान देने लगे और हर परीक्षा को प्रथम श्रेणी में पास करने लगे, मनोज पढ़ने में इतने अच्छे थे कि उनको हर कक्षा में स्कोलरशिप मिलती गयी और वो आगे बढ़ते गए, और कभी कभार अपनी माँ से बोल दिया करते थे “माँ सिविल सेवा में तो हर कोई जाना चाहता है पर मुझे तो भारतीय सेना में ही जाना है”

पढ़ाई लिखाई 

आठवी कक्षा तक लखनऊ के रानी लष्मी बाई स्कूल से पढ़ने कर बाद मनोज आर्मी स्कूल में भर्ती हुए तो मानो जैसे उनके हौसलों को जैसे पंख लग गए हों, और पढ़ाई के साथ साथ वो खेल कूद में भी आगे बढ़ने लगे, और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पास कर उन्होंने, NDA (नेशनल डिफेंस अकैडमी) की लिखित परीक्षा में भाग लिया और वहाँ भी हर परीक्षा की तरह पास हुए, और जब उनको NDA से इंटरव्यू का कॉल आया तो मनोज पांडेय खुशी में झूम उठे, मानो आज जैसे खुशियां मनोज के कदमों की दासी बन गयी, वो खुशियाँ जो मनोज ने बचपन से देखी, वो खुशियाँ जिनके लिए मनोज ने अपने रास्ते के हर दुख को दरकिनार कर दिया, और फिर जा पहुँचे इंटरव्यू देने उस इंटरव्यू में जब आर्मी अफसर ने मनोज से पूछा आप सेना को क्यों जॉइन करना चाहते है ? तो मनोज का जवाब था “मैं परमवीर चक्र जितना चाहता हूँ
(परम वीर चक्र सैन्य सेवा तथा उससे जुड़े हुए लोगों को दिया जाने वाला भारत का सर्वोच्च वीरता सम्मान है। यह पदक शत्रु के सामने अद्वितीय साहस तथा परम शूरता का परिचय देने पर दिया जाता है। 26 जनवरी 1950 से शुरू किया गया यह पदक मरणोपरांत भी दिया जाता है। शाब्दिक तौर पर परम वीर चक्र का अर्थ है “वीरता का चक्र“)
इस पर आर्मी अफसर ने मनोज से कहा क्या आप जानते हो परमवीर चक्र कैसे मिलता है ?, तो इस पर मनोज का जवाब था जनता हूँ ज्यादातर लोगों को मरणोपरांत ही मिलता है पर मुझे अवसर दिया जाए मैं उस परमवीर चक्र को जीवित लाऊंगा

सेना में 

पुणे के NDA (नेशनल डिफेंस अकैडमी) से ट्रेंनिंग ले कर और कमीशन पा कर 6 जून 1995 को जा पहुँचे 11 गोरखा राइफल, और बन गए “कैप्टेन मनोज पांडेय”और तब मानो बदन पर वर्दी पाकर उनको लगा जैसे आशामान में टिमटिमाते चाँद तारे उनके लिए खुद जमीन पर आ गए हों, क्योंकि मनोज ने इस वर्दी को पाने के लिए दिन रात एक किये थे, हर एक गरीब लड़के का सपना होता है भरतीय सेना में जाने का, क्योंकि 90% लड़के आर्मी में गरीब परिवार से ही आते हैं, उनके अंदर भारत माँ की सेवा के साथ साथ अपनी माँ पिता भाई बहनों को भी देखना होता है, क्योंकि आर्मी ही एक ऐसी सेवा है जहाँ आप के न होने के बाद भी या आप दुनियाँ से जाते जाते भी देश के लिए अपने परिवार के लिए बहुत कुछ कर जाते हो ताकि आपका  देश और परिवार खुशी से रह सके, नही तो डॉक्टर इंजीनियर बनने के सपने सब के होते हैं, कई लड़के घर की जमीन गिरवी रखकर भी सेना के लिए मेहनत करते हैं ताकि वो भारत की जमीन सरहद पर खड़े हो कर अपने खून पशीने से सींच सके, जब हम अपने घरों में चैन की नींद सो रहे होते हैं तब वो हमारी सरहदों की पहरेदारी कर सके, उनको आर्मी में जाने से पहले पता होता है कि मैं जा तो रहा हूँ वापस लौटकर आ भी पाउँगा या नही, वो माँ जिस ने उन बेटों को जन्म दिया होता है जो भारत माँ की सेवा में खड़े हैं वो बस दिन रात भगवान से यही मांगती हैं कि उस का बेटा सकुशल घर लौट आये, अरे हम तो दीवाली के पटाखे जलाते हुए भी उस की आवाज़ से डर जाते हैं सहम जाते हैं, और वो भारत माँ के लाल सियाचिन की पहाड़ी पर हड्डियों को जमा देने वाली ठंड के न्यूनतम तामपान 57 डिग्री पर गोलियों की आवाज़ से नही डरते है, हम तो होली पर कोई गालों पर गुलाल रंग दे उस से डर जाते हैं, पर वो भारत के लाल सरहद पर भारत के आँचल को अपने खून के रंग से रंग जाते हैं ।

एक दिन कैप्टेन मनोज पांडेय की माँ ने ममतामयी हो कर बोला, बेटा जब भी सरहद पर कोई दिक्कत या विपदा आती है तू आगे मत जाया कर, इस पर कैप्टेन मनोज पांडेय कहते हैं “माँ अगर जब कभी मुझे कोई कष्ट या विपदा आएगी तुम क्या करोगे, तो माँ कहती है मै खुद तेरे आगे आ कर तेरे सारे कष्ट सह लुंगी, तो कैप्टेन मनोज पांडेय कहते हैं इसी तरह माँ वो सैनिक भी मेरे बच्चे हैं जब उनको कोई कष्ट या विपदा आएगी तो क्या मैं पीछे हट जाऊंगा, ये सुन कर माँ की आंखे भर आती है, उस जज्बे को देख कर जिस के लिए देश,सैनिक और सेना खुद से आगे हैं।

युवा कैप्टेन मनोज पांडेय की पहली पोस्टिंग श्रीनगर में हुई फिर वहां से जा पहुचे सियाचिन, वही सियाचिन जहाँ हर एक फौजी का सपना होता है एक बार उस जगह जा कर अपनी ड्यूटी दें, सियाचिन में ठंडी हवाएं शरीर को आर पार करती निकल जाती, जहाँ सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है, जहाँ बस बर्फ ही बर्फ दिखती हो, इसी बीच 4 मई 1999 को उनकी यूनिट को आर्डर मिलता है ऑपेरशन रक्षक के लिए उनको कारगिल जाना है, और तब उनको ये भी पता नही था कारगिल जहाँ वो जा रहे हैं वहाँ गोलीबारी करने वाले 2-4 आतंकवादी हैं या पाकिस्तानी सेना ।

अदम्य साहस

26 मई 1999 से वो एक बार भी घर पर फ़ोन नही कर पाए थे, लगभग 1 महीने बाद 23 जून को उनके घर वालों को कैप्टेन मनोज पांडेय की चिट्ठी मिलती हैं और उस में लिखा था, माँ आपको टीबी के द्वारा लड़ाई और यहां के हालात पता लग गए होंगे, लेकिन आप चिंता मत करना जहाँ पर मैं हूँ वहाँ पर अभी कठिन समय है, पर मैं ठीक हूँ, आप मेरे चिट्ठी का जवाब जरूर देना, पिता जी का ध्यान रखना, छोटे भाई बहनों का ध्यान रखना, और अपने भाई को लिखा था, पिताजी के पैसे खर्च मत करवाना और पढ़ाई में ध्यान देना।

कारगिल युद्ध के दौरान कैप्टेन मनोज पांडेय को कई मिशनों में लगाया गया था और वो हर मिशन को कामयाबी से पूरा करते चले गए, इस के साथ साथ धीरे धीरे कैप्टेन मनोज पांडेय के कदम वीर से उस परमवीर चक्र की तरफ बढ़ने लगे ।

कैप्टेन मनोज पांडेय को कारगिल युद्ध के दौरान के खालूबार की पोस्ट जीतने का मिशन दिया गया था, और कैप्टेन मनोज पांडेय अपनी यूनिट के साथ रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे थे, पर सामने खड़े दुश्मन को उनकी कदमों की आहट हो चुकी थी, दुश्मन ने पहाड़ियों से छिपकर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दियी, और कैप्टेन मनोज पांडेय जानते थे कि उनके पास रात का ही समय है खालूबार तक पहुंचने के लिए, सुबह होने के बाद यह जंग उनकी मुश्किलें बढ़ा सकता है, उन्होंने तय किया कि वह आगे बढ़ेंगे और कुछ देर उन्होंने अपने साथियों के साथ बात की, और नई रणनीति के साथ सेना टुकड़ी को दो भागों में बांट दिया, एक को दाहिने ओर से और दूसरे को बाईं ओर से दुश्मन पर हमला करने का निर्देश दिया,

उनकी यह योजना काम कर गई और वह दुश्मन को चकमा देने में वो सफल रहे, वह आगे बढ़ते जा रहे थे और एक-एक करके दुश्मन के बंकरों को खत्म करते जा रहे थे, अभी तक वह दुश्मन के कुल तीन बंकरों को तबाह कर चुके थे, तभी उनकी नजर दुश्मन के अगले बंकर पर पड़ी, जहाँ से ज्यादा बमबारी हो रही थी, और कैप्टेन मनोज पांडेय को पता था कि अगर वह इस बंकर को खत्म कर देते हैं, तो उन्हें जीतने से कोई नहीं रोक सकता था, इस संघर्ष में उनके कंधे और पैरों में काफी गंभीर चोटें आ चुकी थी, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह किए बिना अपने हाथ में हथगोले लेकर दुश्मन की ओर टूट पड़े और उनका निशाना अचूक था, कैप्टेन मनोज पांडेय के शरीर से खून बहता रहा, और वह दुश्मन के तीसरे बंकर में पीछे की तरफ से घुसे तो देखा वहाँ दो पाकिस्तानी उनके साथियों पर गोलियां बरसाने वालर थे, कैप्टेन मनोज पांडेय ने खुकरी निकाल कर उनकी गर्दन काट दियी, वह राहत की सांस लेते इससे पहले दुश्मन की मशीन गन से निकली गोलियाँ उनकी हेल्मेट को चीरते हुए सिर के आर पार हो गयी और वह जमीन पर गिर पड़े. वह खून से लतपथ थे. बावजूद इसके मनोज का साहस देखने लायक था. वह हार मानने के लिए तैयार नहीं थे, उन्होंने अपने साथियों से कहा न छोड़नयो मतलब दुश्मन को छोड़ना मत, (नेपाली में गुरखा राइफ़ल में अधिकतर जवान गोरखाली और नेपाली बॉर्डर के होते है) वह अपने साथियों से खुद को छोड़कर आगे बढ़ने के लिए कह रहे थे. वह अपनी आंखों से अपने मिशन को पूरा होते हुए देखना चाहते थे. उन्होंने बंदूक संभाली और अपने साथियों को मरते मरते कवर फायर तक दिया ।
मनोज के साथी ‘खालूबार’ पर भारत का तिरंगा लहरा चुके थे, पर अफसोस उन्होंंने अपने कप्तान को इस संघर्ष में खो दिया था.

जीवन के अंतिम पल  

और भारत का एक वीर सपूत कारगिल पर तिरंगा फहरा कर खुद तिरेंगे पर लिपट आया, उनकी माँ को एक दिन पहले ही सपने में पता लग जाता है, शायद माँ का दिल है जान जाता है कि उस के बेटे के साथ कोई अनहोनी होनी है, उनको सपना आया कि लड़ाई हो रही है मनोज हाफ शर्ट और ग्रे पैंट पहने हैं और बंदूक हाथों में हैं और उनको गोली आ कर लग गयी जब माँ की नींद खुली वो रोने लगी घबरा गई और दूसरे दिन ही 3 जुलाई 1999 को खबर आती है कि कैप्टेन मनोज पांडेय, और 24 साल का एक लड़का भारत माँ की सेवा करते करते अपने खून से इस भारत को सींच गए ताकि आगे आने वाली पीढ़ी इस भारत माँ के आंचल तले अमन और चैन से रह सके। और कैप्टेन मनोज पांडेय ने परमवीर चक्र भी लिया पर उस को लेने के लिए वो खुद इस दुनियां में नही थे।

और जब सेना उनके पार्थिव शरीर को ले कर आई तो कैप्टेन मनोज पांडेय की लिखी डायरी भी दे गई,

उस मे लिखा था …“अगर मेरे खून को साबित करने से पहले मौत हो जाती है तो मैं वादा करता हूँ मैं मौत को मारूँगा”

कैप्टेन मनोज पांडेय को शत शत नमन 🌸🙏🌸

आखिरी खत कुछ इस तरह…. 

I received both your letters but could not reply first one. Our Both of them reached me in midst of hot bottle. It’s really difficult to fight the enemy at this altitude. He is well Inside bunkers and defences and we are in open. He has planned his move very well and has occupied most of heights. Initially things were real bad for us and we suffered most of the casualties but now situation is in control and more planned and deliberate attacks are going on. In last one and half month I have seen the worst and probably ‘OP Vijay’ would account for most human casualties in shortest time. I have myself brushed boulders with death 4 times but might be b-coz of some good work I am still alive. Every day we are receiving letters from all over country saying same sentence ‘Just do it’. Feels really good to see that at time of need/costs our country gets united. I really don’t know what would happen at next moment but till now I can assure you and all countryman that certainly we would push back intruders at whatever we have to pay may be our life…….

This Operation has certainly given some exposure which can not be quantified. Like leading me on face of death. their fear, their loyalty and the stress and strain both physical and mental which human being can take but yaar Indian Army specially an Inf Jawan is ultimate. He would do anything provided led properly. As I have always told you that what Infantry gives you can not be told, but, today I am so proud of my decision of ‘Infantry’ that I can’t explain. Here weather is cold but snow has started melting down. If sun comes then days are generally OK. Nights are cold with temp -5 to -15 C.

If all would get over but some time, I am not …..(text missing)….. told and frankly, no one can say for certainly about his going back. Just one request that guide my brother at this crucial moment of life. (About his future)

Convey my regards to all friends and your for being so considerate to… Do …….remain in touch it gives lot of moral support. If I come back we would have lot of things to talk but certainly this is going to be a ever lasting experience for me.

Yours Manoj

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भारत के लिए क्यों जरूरी है S-400 मिसाइल सिस्टम

भारत और चीन के बीच जंग का माहौल बना हुआ है, अभी 15 जून 2020 को गलवान घाटी में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे,

इसी बीच चीन ने LAC पर कुछ राफेल फाइटर जेट तैनात कर दिए हैं, राफेल फाइटर जेट फिलहाल भारत के पास नही है, पर 27 जुलाई को राफेल फाइटर जेट का पहला दस्ता भारतीय सेना में सामिल हो जायेगा।

इस से बड़ी चिंता की बात है चीन ने LAC पर खतरनाक S-400 मिसाइल सिस्टम को भी तैनात किया हुआ है, जो भारत के पास अभी तक नही है और अगले साल के आखिरी तक शायद मिल जाये, पर अगर अभी युद्ध होता है तो S-400 मिसाइल सिस्टम सब से घातक सिद्ध होगी,

भारत के लिए क्यों जरूरी है S-400

S-400 मिसाइल सिस्टम भारत के लिए रक्षा कवच का काम करेगी, यह किसी भी मिसाइल हमले को ध्वस्त कर सकती है, इस S-400 मिसाइल सिस्टम से भारत पर होने वाले परमाणु हमले का भी जवाब दिया जा सकता है,यह डिफेंस सिस्टम भारत के लिए चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की न्यूक्लियर सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों से कवच की तरह काम करेगा, यहां तक कि यह सिस्टम पाकिस्तान की सीमा में उड़ रहे विमानों को भी ट्रैक कर सकेगा

भारत को कब मिलेगा S-400

भारत ने रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम की पांच यूनिट पांच अरब डॉलर में खरीदने का करार किया था। और पिछले साल इस मिसाइल सिस्टम के लिए 80 करोड़ डॉलर की पहली किस्त का भुगतान भी कर  दिया है, ”एस-400 के करार को पूर्व निर्धारित समय सीमा में लागू किया जाएगा। पहली यूनिट की आपूर्ति वर्ष 2021 के अंत से शुरू हो जाएगी।

क्या है S-400 मिसाइल सिस्टम  

S-400 मिसाइल सिस्टम जिस को SAM भी कहा जाता है SAM का अर्थ है, Surface to Air Missile ये दुनियाँ की सब से खतरनाक डिफेंस मिसाइल प्रणाली है, यह मिसाइल सिस्टम एक साथ में 36 मिसाइलों को मार गिराने की क्षमता रखता और यह लगभग 10 हज़ार फिट यानी 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक निशाना लगा सकता है, इस की खासियत यह है कि यह सीधा (वर्टिकल) खड़ा रहता है जिस की वजह से ये मिसाइल सिस्टम 360 डिग्री कही भी मार कर सकता है ।

S-400 मिसाइल सिस्टम का इतिहास

S-400 मिसाइल सिस्टम का निर्माण रूस में 1990 के दशक में डिज़ाइनर अलमज़ आंटी कंसर्न ऑफ एयर डिफेंस ने निर्माता फकल मशीन बिल्ड़िंग सेंट्रल डिज़ाइन ब्यूरो के तहत किया था, S-400 मिसाइल सिस्टम का मूल नाम S-400 (Triumf) NATO रिपोर्टिंग नाम है रूसी भाषा में, जिस का मतलब होता है “विजय” इसकी लागत 40 लाख डॉलर प्रति आग इकाई है जिस में 8 लांचर 112 मिसाइल कमान और वाहन शामिल हैं

इस कि शरुवात पहले 1970 के दशक में S-300 के रूप में कियी गयी थी जो क्रूज़ मिसाइलों और विमानों के विरुद्ध रक्षा करने के लिए बनाई गई थी, लेकिन बाद में बने संस्करण बैलिस्टिक मिसाइलों को भी रोक सकते हैं, रूस ने फिर S-300 का एडवांस वर्जन S-400 के रूप में किया जो 28 अप्रैल 2007 से सेवा में है और विश्व की सब से सर्वश्रेष्ठ मिसाइल सिस्टम में से एक है ।

क्या फर्क है दोनों मिसाइल में

S-300 मिसाइल सिस्टम

रूसी मिसाइल S-300 48N6E S-300PMU लांचरों से दागी जाने वाली मानक मिसाइलें हैं। 27-30 किमी (17-19 मील) की अधिकतम ऊंचाई पर उनकी 5-150 किमी (3-93 मील) की सीमा होती है

S-400 मिसाइल सिस्टम

S-400 मिसाइल सिस्टम 30 किमी तक की ऊंचाई पर 400 किमी के भीतर विमान, मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी), और बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों सहित सभी प्रकार के हवाई लक्ष्यों को टारगेट कर सकती है। यह एक साथ 36 ठिकानों को टारगेट कर सकती है।

चीन के पास अभी S-300 मिसाइल सिस्टम है जिस को चीन ने वतर्मान घटना को देखते हुए भारत की सीमा लद्दाख़ में तैनात किया हुआ है, चीन S-400 मिसाइल सिस्टम को नही खरीद सकता क्योंकि चीन MTCR का सदस्य नही है

मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR)

एक बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण शासन है। यह 35 सदस्यीय राज्यों के बीच एक अनौपचारिक राजनीतिक समझ है जो मिसाइलों और मिसाइल प्रौद्योगिकी के प्रसार को सीमित करना चाहता है। जी -7 औद्योगिक देशों द्वारा 1987 में शासन का गठन किया गया था। MTCR माल और प्रौद्योगिकियों के निर्यात को नियंत्रित करके बड़े पैमाने पर विनाश (WMD) के हथियारों के प्रसार के जोखिम को सीमित करना चाहता है जो ऐसे हथियारों के लिए वितरण प्रणाली (मानवयुक्त विमान के अलावा) में योगदान कर सकता है। इस संदर्भ में, MTCR कम से कम 300 किमी (190 मील) और उपकरण, सॉफ्टवेयर, और प्रौद्योगिकी की सीमा तक कम से कम 500 किलोग्राम (1,100 पाउंड) का पेलोड देने में सक्षम रॉकेट और मानव रहित हवाई वाहनों पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है। ऐसी प्रणाली।

MTCR एक संधि नहीं है और पार्टनर (सदस्यों) पर कानूनी रूप से बाध्यकारी बाध्यताओं को लागू नहीं करता है। बल्कि, यह उन राज्यों के बीच एक अनौपचारिक राजनीतिक समझ है जो मिसाइलों और मिसाइल प्रौद्योगिकी के प्रसार को सीमित करना चाहते हैं

मिसाइल लॉन्चर यूनिट

एक S-400 TEL (ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर) में चार मिसाइल कंटेनर हैं; प्रत्येक कंटेनर में एक 48N6E या चार 9M96 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हो सकती हैं। S-400 ट्रायम्फ का इस्तेमाल टूमेड ट्रेलर-माउंटेड राडार और मिसाइलों के सेमी-मोबाइल पैकेज के साथ किया जा सकता है। ट्रक 6×6 BAZ-64022 के साथ S-400 ट्रायम्फ एक अर्ध-ट्रेलर व्यवस्था है। फायरिंग की स्थिति में, फायरिंग ऑपरेशन के दौरान वाहन को स्थिर करने के लिए ट्रेलर के प्रत्येक तरफ दो हाइड्रोलिक जैक जमीन पर उतारे जाते हैं।

मिसाइल

S-400 ट्रायम्फ 9M96E और 9M96E2 मिसाइलों का उपयोग करता है। S-400 ट्रायम्फ S-300 PMU-1 सिस्टम की 48N6E मिसाइल और S-300 PMU-2 फेवरिट सिस्टम की 48N6E2 मिसाइलों का भी उपयोग कर सकता है। 48N6E मिसाइल का 12 फरवरी 1999 को सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। विभिन्न प्रभावी रेंजों के साथ एडी मिसाइलों का उपयोग करने की संभावना प्रणाली मॉड्यूलर क्षमता सुनिश्चित करती है जो स्तरित वायु रक्षा और गैर-रणनीतिक मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली स्थापित करना संभव बनाती है। S-400 मिसाइल की अधिकतम सीमा 400 किमी है और यह उच्च सटीकता के साथ सभी हवाई लक्ष्यों को मार सकती है। S-400 9M96E और 9M96E2, उन्नत सर्फेस-टू-एयर मिसाइलों (एसएएम) को आग लगा सकता है, जो अभूतपूर्व प्रभावशीलता के साथ सबसे गंभीर अव्यवस्था वाले वातावरण में वायुगतिकीय और बैलिस्टिक लक्ष्यों की एक विस्तृत श्रृंखला को टारगेट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये मिसाइलें MHCH 15 (4,800-5000 मीटर / सेकंड) की अधिकतम गति और 35,000 मीटर की अधिकतम ऊंचाई पर टारगेट को भेदने में सक्षम हैं।

 

मोबिलिटी                     

सिस्टम एस -400 ट्रायम्फ के ट्रेलर को रूसी ट्रक 6×6 बीएजेड-6402-015 से तैयार किया गया है, लेकिन एस -400 को ट्रक अल्माज 5P90SE या अल्माज 5P90TMU पर भी लगाया जा सकता है। S-400 के ट्रेलर को MAZ-79100 द्वारा भी टो किया जा सकता है।

कमांड और वाहन नियंत्रण
S-400 ट्रायम्फ सिस्टम कमांड और कंट्रोल एसेट्स और AD मिसाइलें विभिन्न स्वचालित नियंत्रण प्रणालियों और रडार सुविधाओं के साथ सहयोग कर सकती हैं। नई AD मिसाइलों के साथ ही सिस्टम S-300 PMU AD मिसाइलों का उपयोग कर सकता है। S-400 ट्रायम्फ नए एंगेजमेंट रडार सिस्टम 92N2E ग्रेव स्टोन का उपयोग करता है, जो नए 8 x 8 MZKT-7930 वाहन द्वारा किया जाता है, बैटरी अधिग्रहण रडार 96L6 चीज़ बोर्ड भी 8×8 ट्रक ZZKT-7930 द्वारा किया जाता है। नए 3D चरणबद्ध सरणी अधिग्रहण रडार को नियोजित किया गया है, 64N6E2 से प्राप्त 91N6E (NATO कोड बिग बर्ड) और 40V6M / MD मास्ट एक उपलब्ध विकल्प है।

55K6E कमांड पोस्ट कार्यरत है, 8 x 8 यूराल 532301 ट्रक द्वारा किया जाता है। कमांड पोस्ट का उपयोग प्रत्येक व्यक्तिगत लांचर वाहन से वायु अंतरिक्ष निगरानी डेटा को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। यह लंबी दूरी के निगरानी रडार को नियंत्रित और मॉनिटर करता है, हवाई खतरों को ट्रैक करता है, खतरों को प्राथमिकता देता है और सभी बैटरियों का समन्वय करता है।

S-400 के लिए उद्धृत वैकल्पिक अधिग्रहण रडार में L-बैंड में 59N6 Protivnik GE और 67N6 Gamma DE शामिल हैं, लेकिन VHF बैंड में 1L119 Nebo SVU भी शामिल हैं। नेबो एसवीयू में स्टील्थ विमानों के खिलाफ दावा करने की क्षमता है। इसके अलावा अधिग्रहण अधिग्रहण रडार प्रकारों के अलावा, एस -400 को टोपाज कोलचुगा एम, केआरटीपी -91 तमारा / Trash कैन, और 85 वी 6 ओरियन / वेगा एमिटर लोकेटिंग सिस्टम के साथ परीक्षण किया गया है, जिसका उद्देश्य अधिग्रहण से बाहर निकलने के बिना उत्सर्जन लक्ष्य को टारगेट करना है। जून 2008 में, निर्माता ने S-400 में 1RL220VE, 1L222 और 86V6 ओरियन एमिटर लोकेटिंग सिस्टम अपग्रेड किया है ।

मिसाइल रेंज
48N6E :- 150 km; 48N6E2 :- 200 km;
9M96E :- 40 km; 9M96E2 :- 120 km;
9M83M/9M82M : 400 km

ऑपेरशन टाइम
S-400 मिसाइल सिस्टम को ले जाने योग्य बनाने में 5-10 मिन्ट का वक़्त लगता है और 3 मिन्ट में मिसाइल सिस्टम को मिसाइल दागने के लिए तैयार किया जा सकता है।

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भारत में टिकटॉक बन्द -देश सर्वोपरि

आज कुछ वीडियो देखें, शायद आपने भी देखे होंगे कुछ लड़कों को कुछ लड़कियों को कुछ छोटे बच्चों को रोते हुए की सोशल मीडिया ऐप टिकटॉक भारत में सरकार ने बैन कर दिया है, कुछ लोग वीडियो बना कर बोल रहे हैं कि एक ऐप बैन होने से उस का सब कुछ खत्म होगा और वही दुसरी तरफ 16 बिहार रेजिमेंट के शहीद हुए कुंदन के पिता बोलते हैं मैं अपने पोतों को भी भारतीय सेना में भेजूंगा, क्या हमारे देश के युवा इतने कमजोर हैं कि एक ऐप के बंद होने से वो अंदर तक टूट गए हैं ? रो कर बिलख कर खुद को क्षति पहुचा रहे हैं ।

टिकटॉक के बारे में

टिकटॉक को सितंबर 2016 में सॉफ्टवेयर डेवलपर बाइटडान्स ने चीन में विकसित किया था इस से पहले उन्होंने एक और ऐप बनाई थी जिस का नाम था “डॉयेन” फिर 2017 में टिकटॉक को चीन के बाहर के देशों में लॉन्च किया गया,
टिकटॉक ऐप उपयोगकर्ताओं को 3 से 15 सेकंड के छोटे वीडियो और लिप-सिंक वीडियो बनाने की अनुमति देता और 3 से 60 सेकंड के छोटे लूपिंग वीडियो, यह एशिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों में लोकप्रिय है

और आप को यह जान कर हैरानी होगी टिकटॉक चीन में बैन है ये ऐप चीन के सर्वर के लिए खतरनाक है।

दुर्भाग्य से, यूट्यूब की तरह,टिकटॉक के पास अभी तक अपने उपयोगकर्ताओं के लिए राजस्व-साझाकरण मॉडल नहीं है। हालांकि,टिकटॉक निर्माता ब्रांड प्रचार और प्रायोजन के लिए अपने टिकटोक खातों का लाभ उठा रहे हैं और राजस्व प्राप्त करने के लिए अपने चैनलों और पर उपयोगकर्ताओं को मोड़ रहे हैं।

जनवरी 2020 में,टिकटॉक फेसबुक और व्हाट्सएप को पार करने वाला सबसे अधिक डाउनलोड किया जाने वाला ऐप बन गया। 2020 के Q1 में टिकटॉक को 31.5 करोड़ नए उपयोगकर्ता मिले, किसी भी ऐप को अब तक के सबसे ज्यादा डाउनलोड एक ही तिमाही में मिले हैं ।

टिकटॉक की कमाई

फाइनेंसियल रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 के अंतिम तिमाही में टिकटॉक ने पिछले साल 17 बिलियन डॉलर की कमाई कियी और इस साल की कमाई पिछले साल के मुकाबले 3 बिलियन डॉलर अधिक है और भारत में टिकटॉक ने 2019 के अंतिम तिमाही में 25 करोड़ की कमाई कियी और 2020 में टिकटॉक की कमाई का टारगेट 100 करोड़ का है ।

उपगोगकर्ता की कमाई

मुख्य रूप से जो टिकटॉक पर वीडियो बनाते हैं वह ज्यादातर अपना पैसा स्पोनोशरशिप या ब्रांड डील से करते हैं. इसलिए आपके जितने ज्यादा फॉलोवर्स होंगे आप उसी के हिसाब से स्पोनोशरशिप के लिए ज्यादा पैसे चार्ज कर पाएंगे. अगर आपके करीब 100,000 फॉलोवर्स हैं तो आप लगभग 10 से 30 हजार रुपये कमा सकते हैं.

वर्तमान में टिकटॉक से सीधे पैसा बनाने का कोई तरीका नहीं है, क्योंकि ऐप अपने सबसे लोकप्रिय सामग्री रचनाकारों को प्रोत्साहन का भुगतान नहीं करता है । कई प्रसिद्ध उपगोगकर्ता अपने फैनबेस का उपयोग करते हैं और उन्हें यूट्यूब, इस्टाग्राम, स्नैपचैट और ट्विटर पर स्थानांतरित करते हैं।

यूट्यूब की तरह टिकटॉक उपयोगकर्ताओं को मोनेटाइजेशन की पेशकश नही करता न ही टिकटॉक के पास यूट्यूब की तरह कोई मोनेटाइजेशन प्रोग्राम है ।

भारत के लिए टिकटॉक को बैन करना बेहद जरूरी है

भारत के लिए टिकटॉक को बैन करना बेहद जरूरी है क्यों कि टिकटॉक भारत और दूसरे देशों से कमाए गए पैसों का एक बड़ा हिस्सा चीन को टैक्स के रूप में देता है और चीन की सरकार उस पैसे को अपने रक्षा बजट में लगाती है, ताकि वो अधिक से अधिक हथियार खरीद सके अपने परमाणु प्रोजेक्ट में और अधिक पैसा लगा सके ,अपने सैनिकों को अधिक सक्षम और ताकतवर बना सके, ताकि चीन फिर अपने पड़ोसी देशों में डर का माहौल पैदा कर सके, हर देश को अधिकार है की वो अपने देश की रक्षा कर सके पर किसी दूसरे देश को अपने हथियारों परमाणु उपकरणों सैनिकों के जरिये डरना धमकाना मानवता के खिलाफ है। और चीन हर साल पाकिस्तान जैसे आतंकवादी देशों को भी फाइनेंसियल तौर पर मदद करता है और पाकिस्तान इस पैसे को आतंकवाद जैसे खतरनाक कामों को बढ़ावा देने में लगा देता है ।

टिकटॉक के नुकसान               

सामाजिक जीवन पर बुरा प्रभाव

टिकटॉक ने सामाजिक दूरियां बढ़ा दियी शायद हमने खुद के संस्कार भी खो दिए,मैंने कल ही एक वीडियो देखी थी एक युवा लड़की टिकटॉक वीडियो बना रही थी और पीछे से उस के पापा उस को आवाज़ दे कर बुला रहे यह शायद कुछ कहना चाहते होंगे या शायद उनको कोई मदद चाहिए होगी पर लड़की ने उनको चिल्ला कर बोला “पापा आप मुझे डिस्टर्ब कर रहे हो” क्या हम सही दिशा में हैं क्या हमारे संस्कार हमे ये सब करने को प्रेरित करते हैं, आप सब ने भी शायद एक वीडियो देखी होगी एक लड़का एक लड़की जिन की उम्र मात्र 10 साल होगी वो एक दूसरे को किस करते हैं जिन की उम्र शायद पढ़ने की है, माना टिकटॉक से आप पैसे कमा सकते हो, पर क्या आपके सपने टिकटॉक तक सीमित है ? क्या आप डॉक्टर,इंजीनियर टीचर नही बनना चाहते ? अगर आप अपना बचपन अपना समय टिकटॉक में बर्बाद कर दोगे तो शायद कुछ नही बन पाओगे, और ऐसी ऐप आएंगी और जाएंगी पर आपका जीवन और समय बहुमूल्य है।

 

डाटा की सुरक्षा 
आपने कई महिलाओं की वीडियो देखी होंगी जो शायद किसी हद तक डाटा सुरक्षा के हिसाब से सही नही है ,आप की वीडियो को कौन डाउनलोड कर रहा है किस मकसद से कर रहा है, आपकी वीडियो किस सर्वर में सेव हो रही है शायद आप को जानकारी नही, मैंने सुहागरात तक कि वीडियो टिकटॉक पर देखी हैं उन वीडियो को कौन अपलोड करता है जो किसी हद तक ठीक नही है ये आपकी प्राइवेट चीजें है अगर ऐसे वीडियो अपलोड होती रही तो शायद आगे चलकर आप को परेशानियों से लड़ना पड़ सकता है।

फेक न्यूज़
कई तरह के फेक न्यूज़ बिना जांच पड़ताल के टिकटॉक पर अपलोड किए जाते हैं जिन का वास्तविक जीवन से कोई लेना देना नही होता, इस तरह के वीडियो से समाज में गलत प्रभाव पड़ता है और एक क्राइम डर का माहौल पैदा होता है, हिन्दू मुस्लिम के बीच दीवार पैदा करने के लिए भी कई वीडियो टिकटॉक पर अपलोड कियी जाते हैं जो हमारे देश के भाई चारे के लिए खतरा है

वल्गर कंटेंट 
वल्गर कंटेंट के चलते टिकटॉक पहले भी भारत में बैन हो चुका है, बहुत सारी वीडियो टिकटॉक में ऐसी देखी जा सकती हैं जो समाज के विपरीत हैं क्योंकि की टिकटॉक में कोई सेंसर बोर्ड नही है और न ही टिकटॉक उम्र के हिसाब से संचालित करता है, क्योंकि की टिकटॉक में बच्चे जिनकी उम्र महज 7 साल के ऊपर की है अगर वो बच्चे इस तरह के वल्गर कंटेंट देखेंगे तो उन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

बिगड़ता स्वास्थ्य
ये सब से अहम है टिकटॉक मनोरंजन के लिए बना था पर आप लोगों के इस की आदत बना लियी, आप खाना पीना भूल जाते हो, ज्यादा से ज्यादा वक़्त आप टिकटॉक पर बिताते हो जिस से आपकी आंखों को नुकसान हो सकता है, आप मेन्टल हेल्थ पर फर्क पड़ सकता है, हो सकता है आपकी वीडियो को लाइक न मिले आप खुद को दिमागी तौर पर परेशान करो, वीडियो बनाते समय कई लोग सुरक्षा का ध्यान नही रखते और हादसे में उनकी जान चली जाती है, आपने हाल ही मे सुना होगा सिखा कक्कड़ ने आत्म हत्या कर दियी, उनकी क्या मनोस्थिति रही होगी  ये समझना भी जरूरी है।

कई देशों में टिकटॉक के खिलाफ कानूनी कार्यवाही कियी गई है

यूएस COPPA जुर्माना

संयुक्त राज्य संघीय व्यापार आयोग ने 27 फरवरी 2019 कोबाल ऑनलाइन गोपनीयता संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन में 13 वर्ष से कम आयु के नाबालिगों से जानकारी एकत्र करने के लिए बाइटडांस यूएस $ 5.7 मिलियन का जुर्माना लगाया।बाइटडांस ने टिकटॉक में किड्स-ओनली मोड जोड़कर जवाब दिया जो वीडियो अपलोड करने, यूजर प्रोफाइल के निर्माण, डायरेक्ट मैसेजिंग और दूसरे के वीडियो पर कमेंट करने के दौरान ब्लॉक करता है, जबकि अभी भी कंटेंट को देखने और रिकॉर्डिंग की अनुमति देता है।

टेनसेंट मुकदमे

अप्रैल 2018 में टेनसेंट के वी चैट प्लेटफार्म पर डॉयेन के वीडियो को अवरुद्ध करने का आरोप लगाया गया था, डॉयेन ने टेनसेंट पर मुकदमा दायर किया और उस पर अपने वी चैट प्लेटफॉर्म पर झूठी और हानिकारक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया, मुआवजे और माफी में 1 मिलियन आरएमबी (चाइनीज करेंसी)  की मांग की। जून 2018 में, टेनसेंट ने एक अदालत में टाउटियाओ और डॉयेन के खिलाफ मुकदमा दायर किया, आरोप लगाया कि उन्होंने बार-बार नकारात्मक खबर के साथ टेनसेंट को बदनाम किया और क्षतिपूर्ति के लिए आरएमबी 1 की मामूली राशि और एक सार्वजनिक माफी की मांग की इसके जवाब में, टुटियाओ ने टेनसेंट के खिलाफ कथित रूप से अनुचित प्रतिस्पर्धा के लिए अगले दिन शिकायत दर्ज की और आर्थिक नुकसान में 90 मिलियन आरएमबी की मांग की।

इंडोनेशिया में प्रतिबंध

3 जुलाई 2018 को इंडोनेशिया ने अश्लील वीडियो और इर्ष्या, निंदा जैसी अवैध सामग्री के बारे में सार्वजनिक चिंता के बीच टीकटॉक ऐप को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। नकारात्मक सामग्री को हटाने, सरकारी संपर्क कार्यालय खोलने, और उम्र प्रतिबंध और सुरक्षा तंत्र को लागू करने सहित कई बदलाव करने के एक सप्ताह बाद ऐप को अनब्लॉक कर दिया गया था

भारत में संक्षिप्त प्रतिबंध

3 अप्रैल 2019 को, मद्रास उच्च न्यायालय ने एक  जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत सरकार से “अश्लील साहित्य को प्रोत्साहित करने” का हवाला देते हुए ऐप पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा था। अदालत ने यह भी कहा कि ऐप का उपयोग करने वाले बच्चों को यौन शिकारियों द्वारा लक्षित किए जाने का खतरा था। अदालत ने प्रसारण मीडिया को आगे कहा कि उन वीडियो में से कोई भी ऐप से टेलीकास्ट न करे। टिकटोक के प्रवक्ता ने कहा कि वे स्थानीय कानूनों का पालन कर रहे थे और कार्रवाई करने से पहले अदालत के आदेश की प्रति का इंतजार कर रहे थे।17 अप्रैल को, गूगल और एप्पल दोनों ने टिकटॉक को गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया।जैसा कि अदालत ने प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया, कंपनी ने कहा कि उन्होंने 6 मिलियन से अधिक वीडियो हटा दिए थे जो उनकी सामग्री नीति और दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते थे।

आप के लिए जरूरी बातें 

टिकटॉक को अब भारत सरकार ने बैन कर दिया है पर आप को परेशान नही होना है, शायद कुछ लोगों की आदत हो गयी होगी टिकटॉक से जुड़े रहने की, अपने फॉलोवर्स से जुड़े रहने की, टिकटॉक बैन हुआ है पर आपके जीवन में खुशियाँ नही,आपके आस पास बहुत सारी खुशियाँ है उनको ढूंढो, अपने अपनो के साथ बैठ कर एक चाय की प्याली का लुत्फ उठाओ, योगाभ्यास करो, कुछ क्रिएटिव चीजों पर ध्यान दो, कहानियां पढ़ो, अपने वास्तविक जीवन में मित्र बनाओ उन से जुडो क्योंकि की सोशल मीडिया पर मिलने वाले मित्र अक्सर वो नही होते जिन की हम उपेक्षा करते हैं।

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राफेल लड़ाकू विमान-Welcome in India

आप ने राफेल के बारे में कई सालों से सुना होगा, न्यूज़ में अक्सर बातें सुनी होंगी कुछ राजनीतिक पार्टियों को राफेल मुद्दे पर लड़ते झड़ते भी देखा होगा, भारतीय सेना को पहला राफेल 27 जुलाई को भारत को मिल जाएगा। योजना के मुताबिक पहले 4 राफेल लड़ाकू विमान अंबाला आने वाले थे लेकिन फ्रांस अब कुछ ज्यादा संख्या में लड़ाकू विमानों के भेजेगा

आज आप को बताते हैं राफेल है क्या ?, इस से भारत की सेना को क्या फायदा मिलेगा, ये राफेल कैसे काम करता है, राफेल को किस ने बनाया था, आज आप को राफेल की सारी जानकारी मिलेगी ।

राफेल प्रोग्राम को फ्रांस में 1985 को एयरक्राफ्ट डिज़ाइनर मार्सेल दसॉल्ट ने शुरू किया था, दसॉल्ट एविएशन की स्थापना 90 साल पहले 1929 में मार्सेल बलोच ने की थी, दूसरे विश्व युद्ध के बाद, मार्सेल बलोच ने अपना नाम बदल कर मार्सेल दसॉल्ट रखा, और 20 जनवरी 1047 को कम्पनी का नाम बदल कर एविएशन मार्सेल दसॉल्ट कर दिया गया ।

राफेल का पहला प्रोटोटाइप 1986 में उड़ा था प्रोटोटाइप एक तरह का तकनीकी डेमो की तरह होता है,और जब ये प्रोटोटाइप फ्रांस की सरकार को पसंद आया उन्होंने राफेल को आधिकारिक तौर पर स्वीकृत दे दियी और अपने आर्मी में सामिल करने के लिए बजट पास कर दिया, फिर 1987 में राफेल का तकनीकी तौर पर काम शुरू किया गया,

पहला राफेल फ्रांस की नेवी के लिये शुरू किया गया 2004 में, फिर इस के बाद 2006 में फ्रांस की एयरफोर्स के लिए ।

एयरफोर्स हमेशा अलग अलग मिशन पर काम करती है जैसे
Air Superiority (हवा की श्रेष्ठता)
Bombing (बम विस्फोट)
Reconnaissance (सैनिक परीक्षण)
Missile Firing (मिसाइल फायरिंग)
Strategic Bombing (रणनीतिक बमबारी)
Nuclear (नाभिकीय)
Strike Fighter (स्ट्राइक फाइटर)
Naval Operation (नौसेना संचालन)

हर मिशन के लिए अलग अलग फाइटर प्लेन की जरूरत होती हैं, और जब राफेल बनाया जा रहा था उस समय ये सभी तकनीकी बातें ध्यान में रख कर उस का डिज़ाइन किया गया ताकि ये सभी तकनीकी एक ही फाइटर प्लेन में सामिल हों और सेना को संचालन में आसानी हो, इस लिए राफेल को ओमनी रोल फाइटर प्लेन भी कहा जाता है, और राफेल इकलौता ऐसा फाइटर प्लेन है जो सारे ऑपेरशन एक साथ कर लेता है,

राफेल की तकनीकी बातें

जब  प्लेन खाली होता है इस का वजन 11 टन होता है और ये अपने वजन से डेढ़ गुना ज्यादा (16 टन) हथियार और फ्यूल ले जा सकता है और ऐसा काम करने वाला दुनिया में इकलौता फाइटर प्लेन राफेल ही है।

राफेल बनाने में 25 किलोमीटर तार लगी है आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस के अंदर कितनी एडवांस तकनीकी दियी गयी है।

राफेल में 3500 से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है ।

राफेल को पूरा सॉफ्टवेयर से सिम्युलेट और डिज़ाइन किया गया है जो दसॉल्ट एविएशन का खुद का सॉफ्टवेयर Katya है।

एक राफेल को बनाने में 2 साल का वक़्त लगता है और 6000 से अधिक लोग एक राफेल बनाने में काम करते हैं ।

राफेल को तीन version(संस्करण) में बनाया गया है

राफेल बी-दो सीट एयरफोर्स (अभ्यास के लिए)
राफेल सी- एक सीट
राफेल एम- नौसेना के लिए
नौसेना के लिए राफेल में अरेस्टिंग हुक दिए गए हैं और लैंडिंग गियर भी मजबूत बनाये गए हैं ताकि राफेल एयरक्राफ्ट कैरियर पर आसानी से और बिना किसी नुकसान से जम्प कर सके ।

नौसेना एयरक्राफ्ट कैरियर में ऑपरेट करने के लिए राफेल बहुत अच्छा है राफेल 400 मीटर छोटे रनवे पर टेकऑफ और लैंड आसानी से कर सकता है।

इस में बेहतरीन तकनीकी दियी गयी है जैसे :-

Passive Sensor
एक निष्क्रिय सेंसर एक माइक्रोवेव उपकरण है जिसे पृथ्वी की सतह और उसके वायुमंडल के घटकों द्वारा उत्पादित प्राकृतिक उत्सर्जन को प्राप्त करने और मापने के लिए डिज़ाइन किया गया है। … पैसिव सेंसर रेडियो एस्ट्रोनॉमी इंस्ट्रूमेंट्स के बाद पैटर्न किए जाते हैं, जो उत्सर्जन का पता लगाते हैं, जिसमें बहुत कम बिजली होती है।

Multi directional Radar
रडार एक पहचान प्रणाली है जो वस्तुओं की सीमा, कोण या वेग को निर्धारित करने के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग करती है। इसका उपयोग विमान, जहाज, अंतरिक्ष यान का पता लगाने के लिए किया जा सकता है राफेल में लगा रडार अलग अलग दिशाओं में काम करता है और एक साथ एक बार में 40 टारगेट का 100 किलोमीटर के अंदर पता लगा सकता है।

Reconnaissance
सैनिकों के छोटे समूहों को भेजकर या विमान, आदि का उपयोग करके दुश्मन सेना या पदों के बारे में जानकारी (रेकी) प्राप्त करने की प्रक्रिया राफेल में एक Reconnaissance पोड लगाया गया है जिस का वजन 1टन का है जिस में डिजिटल कैमेरा लगा है जो 1 सेंटीमीटर तक के फोटो ले सकता है और ये सुपर सोनिक रफ्तार में भी बहुत अच्छी और साफ फ़ोटो ले सकता है,डाटा ले सकता और जानकारी ले सकता है।

Spectra
राफेल के पीछे की तरफ और राफेल के पंखों की तरफ स्पेशल सेंसर लगाए गए हैं जो दुश्मन के रडार को बंद करने का काम करता है और दुश्मन के मिसाइल का पता लगा कर उस की जानकारी पायलट को देता है ताकि पायलट पहले से सावधान हो जाये, राफेल इलेक्ट्रो मेग्नेटिक प्लस भी छोड़ता है ताकि दुश्मन द्वारा छोड़ी गई मिसाइल राफेल में सही टारगेट न लगा पाये।

ZOOM Telescope
राफेल में टेलीस्कोपिक पोड लगाए गए हैं जिन का काम रडार से पता लगाएं गए टारगेट की ऑप्टिकल फ़ोटो बना कर पायलट को दिखाता है और ये दूसरे के रडार से भी डेटा ले सकता है।

हथियार प्रणाली 

Mica : एयर टू एयर मिसाइल 50 किलोमीटर
Meteor : एयर टू एयर मिसाइल 150 किलोमीटर
Sclap क्रूज मिसाइल : 300-500 किलोमीटर

Laser &GPS Guided Bomb : ये 10 किलोमीटर से ही दुश्मन के टारगेट का पता लगा कर बम गिरा सकता है

Axocet एन्टी शिप मिसाइल जिस की रेंज 70 किलोमीटर तक है और राफेल पूरे के पूरे वॉर शिप को तबाह कर सकता है

राफेल ही एकमात्र ऐसा फाइटर प्लेन है जो ये सभी हथियार को एक साथ ले जा सकता है और काम कर सकता है

राफेल में लेज़र टार्गेटिंग पोड भी लगा है जो ग्राउंड लेवल को पिन पॉइन्ट टारगेट करना ताकि गिराए गए बम सही ठिकानों पर गिरे

राफेल में छुपी हुई बंदूक भी है जिस का नाम गिया गन है जो एक मिनट में 3000 राउंड (गोली) फायर कर सकती है

राफेल में 2000 लीटर के तीन फ्यूल टैंक अलग से लगाए जा सकते हैं ताकि राफेल लम्बे समय के युद्ध और मिशन को आसानी से पूरा कर सके

राफेल में कंप्यूटर कंट्रोल कैनार्डस लगे हैं जिस का काम प्लेन को हवा के रुख में बैलेंस रखा जाए जो पूरी तरह से कंप्यूटर से कंट्रोल होता है जिस से पायलट को संचालन में आसानी होती है और ये कंप्यूटर कैनार्डस लैंडिंग के वक़्त हवा को रोकने का काम करते हैं जिस से राफेल की रफ्तार कम हो जाती है और राफेल आसानी से लैंड हो जाता है और इस खूबी के साथ ये दुनिया का इकलौता फाइटर प्लेन है।

तकनीकी खराबी के दौरान इस का इंजन केवल एक घंटे में बदला जा सकता है

एक राफेल की कीमत लगभग 68 मिलियन डॉलर है और जो तकीनीकी के हिसाब से सस्ता है और बजट में है

दसॉल्ट एविएशन के अनुसार राफेल कि सेल्फ लाइफ 75 साल है इस का एयर फ्रेम कॉर्बन कॉम्पोनेन्ट का बना है जिस से राफेल की लाइफ बढ़ जाती है

अगर जानकारी अच्छी लगी तो लाइक और शेयर जरूर करे आपके लिए रोचक जानकारी हम लाते रहेंगे

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मन की बात-पीएम मोदी-66वां प्रसारण

मन की बात-66वा प्रसारण 28th June 2020   

रेडियो के सुप्रसिद्ध कार्यक्रम मन की बात में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बार फिर से देश को संबोधित किया, इस कार्यक्रम की शुरुवात 5 साल पहले 3 अक्टूबर 2014 को आकाशवाणी रेडियो पर प्रसारित किया गया जिस के जरिये पीएम मोदी देश के नागरिकों से जुड़ते हैं उनको अपनी मन की बात सांझा करते हैं, अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भी जनवरी 2015 पीएम मोदी के साथ इस कार्यक्रम में भाग ले चुके हैं और इस कार्यक्रम के जरिये उन्होंने भारत के नागरिकों के सवालों के जवाब भी दिए ।

आज का ये कार्यक्रम 66वां प्रसारण था,और के इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम की शुरूआत एक गीत के से की, उन्होंने कहा कि हमारे यहां कहा जाता है, सृजन शास्वत है, सृजन निरंतर है यह कल-कल, छल-छल बहती क्या कहती गंगा की धारा? युग-युग से बहता आता यह पुण्य प्रवाह हमारा, क्या उसको रोक सकेंगे, मिटनेवाले मिट जाएंगे, कंकड़-पत्थर की हस्ती, क्या बाधा बनकर आए हैं।

देश कोरोना से लड़ रहा है     

उस के बाद पीएम मोदी ने कहा कि देश कोरोना से लड़ रहा है, बहुत सारे लोग ये पूछते हैं कि ये साल कब खत्म होगा, तो मैं उनसे कहना चाहता हूं , भारत तो वीरों का देश है, जो कभी चुनौतियों से घबराता नहीं है, भारत में जब भी संकट आए हैं, वो सभी को जीतकर आगे आया है, संकट के दौर में नए अविष्कार हुए, नए साहित्य रचे गए, नए अनुसंधान हुए, नए सिद्धांत गड़े गए,यानि संकट के दौरान भी हर क्षेत्र में सृजन की प्रक्रिया जारी रही है।

और अब भारत लॉकडाउन से देश बाहर आ चुका है और अनलॉक होने प्रक्रिया शुरू कर दियी गयी है, लेकिन इस अनलॉक के दौरान लॉकडाउन से ज्यादा सतर्कता बरतनी है, मास्क पहनना और दो गज की दूरी बनाना बहुत जरूरी है। आप लापरवाही न बरतें। अपना भी ख्याल रखें और दूसरों का भी, तभी हम इस जंग को जीत पाएंगे और विजयी होंगे, मुझे अपने देश की 130 करोड़ की जनता पर पूरा भरोसा है को वो इस लड़ाई को जीतेंगे और नई ऊंचाइयां तय करेंगे, अनलॉक के इस समय में, दो बातों पर बहुत ध्यान देना है, कोरोना को हराना और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना उसे ताकत देनी है।

और उन्होंने आज चीन के ताज़ा हालातों पर भी बात कियी उन्होंने कहा….
“भारत की जमीं की तरफ आंख उठाकर देखने वालों को मिला करारा जवाब”

बिहार के शहीद कुंदन को भी किया याद 

और पीएम मोदी ने लद्दाख़ में 15 जून को शहीद हुए बिहार के कुंदन को भी याद किया पीएम मोदी ने कहा शहीद कुंदन के पिता के शब्द मेने कानों में गूंजते हैं,लद्दाख़ में शहीद होने वाले कुंदन के पिता ने कहा था “मेरा एक और बेटा होता तो मैं उसे भी सेना में भेजता, लेकिन मैं अपने पोतों को देश की सरहदों के दुश्मनों से लड़ने के लिए सेना में जरूर भेजूंगा”

ये आज के पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम के कुछ अंश थे आगे भी हम आप से जुड़े रहेंगे ऐसे ही रोजक जानकारी लेकर

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कैप्टन विजयंत थापर और आखिरी खत-कारगिल विजय दिवस

आज एक कहानी सुनते हैं, उस लड़के की जिस की उम्र महज 22 साल थी, हां सही सुना आपने 22 साल,

22 साल की उम्र में अधिकतर लड़के किसी गली कूचे में खड़े होकर बिना मतलब झगड़ रहे होते हैं,

वही दूसरी ओर हमारे देश का एक वीर योद्धा ऐसा भी था जो 22 साल की उम्र में सब से भीषण युद्ध में सब से कठोर मिशन पर निकल रहा था ये कहानी उसी वीर योद्धा की है जिस का नाम है कैप्टन विजयंत थापर (रॉबिन) जिन का जन्म

26 दिसंबर 1976 नंगल (पंजाब) में हुआ था,                                         

ये कहानी हमको कई शिक्षा दे कर जायेगी, जब हम हताश, परेशान होते हैं अक्शर टूट जाते हैं घबरा जाते हैं हम हार मान जाते हैं, वही कैप्टन विजयंत थापर जैसे वीर योद्धा उन परेशानियों से घबराते नही बल्कि डट कर मुकाबला करते हैं,

कैप्टन विजयंत थापर घोर अंधेरे में एक टेन्ट के अन्दर बैठे हैं बाहर का तापमान -5 डिग्री है और कुछ भी पलों बाद उन को 16,500 फिट की पहाड़ी को फ़तह करने के लिए निकलना है, और उस पहाड़ी के ऊपर पाकिस्तानी सेना लगातार गोले बरसा रहीं है, और उनको ये तक पता नही वो जिस मिशन पर जा रहे हैं लौटकर वापस आएंगे भी या नही लेकिन कैप्टन विजयंत थापर बिना घबराए उस टेन्ट के अन्दर बैठ कर बेफिक्र होकर अपने वॉकमैन पर एक गाना रिकॉर्ड करते हैं ताकि जाते जाते अपने माँ पापा को अपनी आवाज़ सुना सकें, और वो गाना था ” चलते चलते मेरे ये गीत याद रखना ..कभी अलविदा न कहना”

सफरनामा खूबसूरत पलों का                                       

12 दिसंबर 1998 को IMA देहरादून से कमीशन हो कर वो अपने पल्टन 2 राजपुताना राइफल ग्वालियर चले गए और वहां कुछ दिन रहकर उनको भेज दिया गया कुपवाड़ा (जम्मू & कश्मीर)
जहाँ उनकी पोस्ट थी उस के पास में ही एक स्कूल था, उस स्कूल में एक पांच साल की लड़की पढ़ती थी नाम था रुखसाना वही रुखसाना जिस के पाप की हत्या कुछ साल पहले आतंकवादियों ने कर दियी थी, और उस सदमे की वजह से रुखसाना की आवाज़ चली गयी थी, कैप्टन विजयंत थापर जब भी उस लड़की को देखते वो लड़की परेशान गुमशुम रहती थी, और ये देख कर कैप्टन विजयंत थापर से रहा नही गया और उन्होंने स्कूल प्रिंसिपल से पूछा ही लिया, और जब प्रिंसीपल से उस बच्ची की कहानी सुनी तो कैप्टन विजयंत थापर का दिल मोम सा पिघल गया, उस के बाद जब भी कैप्टन विजयंत थापर को वक़्त मिलता वो रुकशाना से मिलने आ जाते थे, और एक दिन ऊपर वाले की मेहर से रुखसाना बोलने लगी, और वो उस का सारा खर्चा स्कूल की फीस भरने लगे, ये हम नही कह रहे हैं उनकी खुद की लिखी डायरी बोल रही है उनका लिखा खत बोल रहा है,

उस डायरी के कुछ अंश हैं 

मैं अपने देश का झण्डा हमेशा बुलंद रखूँगा
मैं मौत के बाद अपनी आंखें दान करूंगा
मैं सिगरेट शराब मांस और अंडों का सेवन नही करुंगा
मैं कभी अपनी आंखों में नही गिरूंगा
मैं एक बच्चे को गोद लूंगा
मौत से पहले मैं राम को याद करुंगा

और वो करणी माता के भक्त थे और करणी माता उनकी फौजी यूनिट 2 राजपुताना राइफल की कुल देवी हैं,

अंतिम पथ पर                         

और अब बात उस मिशन की महज 3 महीने का बाद ही मई 1999 में  उनको कारगिल युद्ध के लिये जाना पड़ा और वो कुपवाड़ा से द्रास पहुचे और उनकी पल्टन 2 राजपुताना राइफ़ल को तोलोलिंग  में घुसे दुश्मनों को उखाड़ फेंकने के ऑपरेशन की जिम्मेदारी मिली थी. ऊंचाई पर छिपे बैठे दुश्मन को चुन- चुन कर मारने की कोशिश जारी थी. बेहद खतरनाक और मुश्किल चोटियों पर कैप्टन थापर अपनी पलटन के साथ जीत का तिरंगा फहरा चुके थे. और उस के बाद वो अपने अगले मिशन पर निकले

अगली लड़ाई आसान नहीं थी। यहां उनकी यूनिट तोलोलिंग और टाइगर हिल के बीच फंसी थी और ऊपर पहाड़ी पर पाकिस्तानी सेना कब्जा जमाए बैठी हुई थी। 29 जून की रात 15 हजार फुट की सीधी चढ़ाई को पार करना आसान नहीं था। रात का तापमान -15 डिग्री सेल्सियस था। जैसे ही कैप्टन थापर अपने कमांडर और यूनिट के साथ चढ़ाई पूरी कर ऊपर पहुंचे तो दुश्मन ने 100 एमएम की मशीन गन से फायरिंग शुरू कर दी।

कंपनी कमांडर के साथ अधिकांश जवान शहीद हो गए या घायल हो गए। ऐसे में कैप्टन विजयंत थापर खुद आगे आए और मोर्चा संभाला। कैप्टन थापर दुश्मन की मशीन गनों से केवल 15 मीटर की दूरी पर थे कि दुश्मनों ने फायरिंग शुरू कर दी। देश के इस लाल ने गोली अपने माथे पर खाई और शहीद हो गया। बताया जाता है कि वह अपने साथी नायक तिलक सिंह की बाहों में गिरे थे। और 22 साल का एक भारत माँ का लाल भारत माँ के खातिर भारत माँ के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर 29 जून 1999 को वीरगति प्राप्त हो गया और लिपट कर उस लहराते तिरेंगे से अपना लहूलुहान ह्यदय लगा लिया, देश के इस वीर जवान को शत शत नमन और श्रद्धा सुमन अर्पित 🌸🙏🌸

2 राजपूताना राइफल्स के कैप्टन विजयंत थापर ने शहादत के ठीक पहले अपने परिजनों को एक खत लिखा था। इस खत को पढ़कर कोई भी यह समझ सकता है कि लड़ाई के उन नाजुक पलों में भी उनके हौंसले कितने बुलंद और अखंड थे।

अमर शहीद कैप्टन विजयंत थापर ने खत लिखा था कि-

प्‍यारे मम्‍मी-पापा, बर्डी और ग्रैनी

जब तक आप लोगों को यह पत्र मिलेगा, मैं ऊपर आसमान से आप को देख रहा होऊंगा और अप्‍सराओं के सेवा-सत्‍कार का आनंद उठा रहा होऊंगा।

मुझे कोई पछतावा नहीं है कि जिन्दगी अब खत्म हो रही है, बल्कि अगर फिर से मेरा जन्‍म हुआ तो मैं एक बार फिर सैनिक बनना चाहूंगा और अपनी मातृभूमि के लिए मैदान-ए-जंग में लड़ूंगा।

अगर हो सके तो आप लोग उस जगह पर जरूर आकर देखिए, जहां आपके बेहतर कल के लिए हमारी सेना के जांबाजों ने दुश्मनों से लोहा लिया था।

जहां तक इस यूनिट का सवाल है, तो नए आने वालों को हमारे इस बलिदान की कहानियां सुनाई जाएंगी और मुझे उम्‍मीद है कि मेरा फोटो भी ‘ए कॉय’ कंपनी के मंदिर में करणी माता के साथ रखा होगा।

आगे जो भी दायित्‍व हमारे कंधों पर आएंगे, हम उन्‍हें पूरा करेंगे।

मेरे आने वाले पैसों में से कुछ भाग अनाथालय को भी दान कीजिएगा और रुखसाना को भी हर महीने 50 रु. देते रहिएगा (रुखसाना एक पांच-छह साल की बच्ची ​थी, जिसके माता-पिता एक आतंकी हमले में मारे गए थे। इसके बाद उसकी आवाज चली गई थी, लेकिन विजयंत थापर से मिलने के बाद उसकी आवाज पांच महीनों में वापस आ गई थी। दोनों एक-दूसरे के साथ खेलते थे। विजयंत उस बच्ची को बेटी की तरह प्यार करते थे।) और योगी बाबा से भी मिलिएगा।

बेस्‍ट ऑफ लक टू बर्डी। हमारे बहादुरों का यह बलिदान कभी भूलना मत। पापा, आपको अवश्‍य ही मुझ पर गर्व होगा और मां भी मुझ पर गर्व करेंगी। मामाजी, मेरी सारी शरारतों को माफ करना। अब वक्‍त आ गया है कि मैं भी अपने शहीद साथियों की टोली में जा मिलूं।

बेस्ट ऑफ लक टू यू ऑल।

लिव लाइफ किंग साइज।

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क्यों होती हैं आत्म हत्याएं !

आप ने हाल ही में सुना होगा कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या कर दियी

इस खबर ने हम को अंदर तक हिला दिया था, हम को ऐसा लग रहा था जैसे हमारा कोई खास अपना इस दुनियां से चला गया हो ।

हमारे आस पास हर रोज न जाने कितने लोग आत्म हत्या का शिकार हो जाते हैं पर हमको खबर तक नही होती और खबर होती भी है तो हम अनसुना कर देते हैं क्यों कि वो इंसान सायद हम से तालुक नही रखता ।

क्या आप को पता है ? हमारे देश में हर 4 मिन्ट में एक व्यक्ति खुदकुशी करता है, NCRB & WHO की रिपोर्ट मुताबिक हमारे देश में सब से ज्यादा आत्म हत्या का कारण परिवारिक समस्याएं हैं, इस के बाद बीमारी, सादी, प्रेम संबंध और दूसरे कारण आते हैं।

आत्म हत्या का शिकार होने वाले लोगों में सब से बड़ा हिस्सा युवाओं का है जिन की उम्र महज 15 से 40 साल की होती है।

दक्षिण एशियाई देशों में भारत में सब से ज्यादा 16.5 प्रति लाख आत्महतायें होती हैं उस के बाद दूसरे नंबर में श्रीलंका 14.6 प्रति लाख और तीसरे नंबर पर थाईलैंड 14.4 प्रति लाख जैसे देश सामिल हैं ।

महिलाओं की आत्महत्या की सूची में भारत विश्व में तीसरे नंबर पर है जिस की आत्मा हत्या दर 14.7 प्रति लाख है।

WHO की रिपोर्ट 2016 के अनुसार लगभग 8,00,00 लोग हर साल आत्म हत्या के शिकार हो जाते हैं ।

क्यों होती हैं आत्म हत्याएं ?     

इस के जिम्मेदार हम खुद होते हैं क्यों कि हमारे आस पास ही न जाने कितने लोग उस मनोदशा से गुज़र रहे होते हैं और शायद हम उन पर ध्यान नही देते, शायद हम सब अपने जीने के तौर तरीकों में व्यस्त हैं या फिर हम सब उन चीजों में पड़ना ही नही चाहते या फिर हमारे पास समय ही नही है कि किसी सामने वाले को समझ सके या उस को समझा सके उस को प्रोत्साहित कर सकें या फिर हम ऑनलाइन बने रिश्तों में इतना उलझ चुके हैं कि हमारे पास पड़ोस में रहने वालों कि हमको परवाह ही नही होती, आज के इस दौर में हम सब रिश्ते को ऑनलाइन ढूंढते हैं और इसी जद्दोजहद में हम अपने मूल रिश्तों को भूल जाते हैं, हम उन ऑनलाइन रिश्तों में उलझ कर धीरे धीरे अपने माता पिता भाई बहन तक से दूर जो जाते हैं और हम अपने वास्तविक रिश्तों से बात करना कम कर देते हैं और एक समय ऐसा आता है जब हम मानसिक तौर से परेशान होते हैं तो हम उस परेशानी को अपने माता पिता भाई बहन तक से नही बता पाते और जब वो परेशानी बर्दाश्त से बाहर हो जाती है तो हम आत्महत्या जैसी गहरी खाई की तरफ कदम बढ़ा देते हैं ।

आत्महत्या रोकी जा सकती है   

जी हाँ आत्म हत्या रोकी जा सकती है, इस के लिए सब से पहले आपको समझना होगा कि ये मानव जीवन एक ही बार मिलता है और आत्महत्या करने वाला व्यक्ति तो दुनियां से चला जाता है पर वो ये नही सोचता कि उस के जाने के बाद उस के घर वालों का उस के माता पिता भाई बहन का क्या होगा, उन का क्या होगा जिस के साथ उस ने कभी कुछ ख़ुशी के पल बिताए होंगें वो सब सदमें में चले जाते हैं उनकी मनोदशा भी वैसी ही हो जाती है जैसी उस आत्महत्या करने वाले व्यक्ति की थी, वो भी अपनी मानसिक दशा को खो देते हैं वो उस घटना से बाहर ही नही आ पाते और मजबूर हो जाते हैं कि कोई गलत कदम उठा लें, क्या आप चाहेंगे कि आपके जाने के बाद, आपकी आत्मा हत्या के बाद आपका कोई खास व्यक्ति भी आत्म हत्या जैसे कठोर कदम उठाए ?

आपकी मनोदशा अगर ठीक नही चल रही, या आप परेशान हो अपनी निजी जिंदगी से, अपने निजी कामों की वजह से, तो आप को हताश और निराश होने की जरूरत नही, दुख और सुख एक ही डाल की दो टहनियाँ हैं अगर दुख है तो सुख भी होगा, और ये दुख तो उस बादल की तरह है जो बे-मौसम आ कर एक सुनहरे खिलते चमकते अथाह आसमान में सूरज से लड़ने लगता है पर इस लड़ाई में आपको पता है जीत हमेशा सूरज की होती है क्यों कि उस सूरज को अपना वजूद पता है उस को अपने आप पर भरोसा है, वो सूरज हर रोज निकल आता है उन बादलों से लड़ने, इसी तरह आपके दुख आस्थाई नही स्थाई हैं, और इन दुखी बादलों के छटने के बाद जो सुनहरी धूप खिलती है वो अति मनमोहक होती है,

आप के पास हैं बेसुमार खुशियाँ 

आप अपने आप पास खुशियाँ ढूढों आप के आस पास बेसुमार खुशियाँ हैं, आप ने उन लोगों को भी देखा हो जो चिलचिलाती धूप में मेहनत मजदूरी करते हैं, उनको एक वक्त की रोटी भी ठीक से नसीब नही होती, पर वो जीते हैं अपने लिए अपने अपनों के लिए, तो आप भी जी सकते हैं अपने लिये अपने अपनों के लिए, उनके लिए जो आप को इस दुनियां में ले कर आये हैं, वो माँ जिस ने आप को नौ महीने का कष्ट सह कर आप को एक हसीन ज़िन्दगी दियी हैं, वो माँ जिस ने न जाने हर रोज आप के लिए कितने कष्ट सहे होंगे खुद भूखी रही होगी, रात रात भर जाग कर आप को एक प्यारी सी नींद दियी होगी, वो माँ जिस ने आप को अपने गोद नें सुला कर न जाने कितनी लोरियां सुनाई होंगी, वो पापा जिस ने आपको अपने कंधे में बिठा कर न जाने किन किन रास्तों से चले होंगे, वो पापा जिस ने खुद फटे पुराने कपड़े पहन आपको हमेशा अपने सपनों के आगे रखा होगा, वो भाई बहन न जाने कितनी दफा आप के साथ लड़ते झगते गिरते संभालते आप के साथ कुछ खेल खिलोने खेले होंगे, वो पत्नी जो आप के लिए अपना सब कुछ छोड़ अपना बचपन छोड़ अपने माँ पापा को छोड़ आप के साथ जीने चले आती है, वो पति जो आप के लिए आप के सपनों के लिए हर रोज घर से निकल जाता है अपने रोजमर्रा के कामों में, तो आप क्या इन प्यारे से लोगों को जिन्होंने आप के लिए सब कुछ किया उनको दुखी करना चाहोगे, अपनी आत्मा हत्या कर उनको ज़िन्दगी भर रुलाना चाहोगे ?? नही न ? तो आप इन सब के लिए जियो अपने खुद के लिये जियो, और ये भी सच है कि मौत एक दिन सब की आती है तो आत्मा हत्या कर के क्यों ? कयों न इस ज़िन्दगी को हँस कर जिया जाए, धन दौलत किसी के पास कम होती है किसी के पास ज्यादा, जिन के पास ज्यादा है वो भी दुखी हैं कयों की अगर सुख है तो दुख भी होगा, और अगर आपको इस दुनियां में ऊपर वाला ले कर आया है तो आपके लिये कुछ न कुछ अच्छा करेगा, बस इंतजार करना होता है सही समय का जब आप का समय सही होगा दुनियां की कोई ताकत आप की खुशियाँ नही रोक सकती, कोई परेशानी होती हैं पहले खुद अपने आप से बात करो, अच्छे कामों में मन लगाओ,अपने घर वालों से बात करो अपनी बातों को सांझा करने में झिझक मत करो, हर चीज़ का समाधान है पर ज़िन्दगी का समाधान मौत नही है, जीना सीखो ज़िन्दगी के खट्टे मीठे फलों को प्राप्त करो उनका स्वाद लो, ज़िन्दगी आप को हसीन लगेगी ।

मत झूलो तुम फांसी से
जीवन बड़ा अनमोल है

जो मिल गए हैं इस माटी में
उनका कहाँ अब मोल है

जीवन जीने के संकल्प में
तुम जो यूँ हार जाओगे

झूला कर ज़िस्म को फंदे से
क्या आत्मा को मार पाओगे

हिम्मत जुटा मायूसी छोड़ो
बाँधायें पल में हट जाएंगी

दुख तो हैं आसमानी मेघों से
ये वक़्त के साथ छट जाएंगी

मत झूलो तुम फांसी से
जीवन बड़ा अनमोल है

Live on….❤️

आप इन नंबरों में कॉल कर के अपनी समस्या जिस से आप झूझ रहे हो बता सकते हो, आप की सारी जानकारी गुप्त रखी जाती है, और आपको हर संभव सहायता कियी जाती है, ताकि आप ज़िन्दगी को खुश हो कर जियें

AASRA – Suicide Prevention and Counselling NGO +91-9820466726

FORTIS-Stress Helpline+91-8376804102

Parivarthan+91-7676602602

ICall+91-9152987821

 

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डॉक्टर कैसे बने और कैसे करे NEET की तैयारी,

कैसे करे NEET की तैयारी ! 

आपको आज बताते हैं कैसे आप NEET एग्जाम दे कर उस को पास कर के अपने सपनों को उड़ान दे सकते हैं, कैसे आप एक डॉक्टर बन कर किसी की ज़िन्दगी बचा सकते हैं, तो आज आप को बताते हैं कैसे NEET की तैयारी होती है…..

सब से पहले                                                    

आप को मानसिक तौर पर तैयारी करनी होगी उस की तैयारी 10th के बाद ही शुरू हो जाती है, ताकि आप के मार्क्स अच्छे हो और आप को 11th में आसानी से एडमिशन मिल जाये।
इसके लिए 10th में औसतन 60% मार्क्स लाना अनिवार्य है, जिससे कि आगे चलकर आप फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषय का चयन कर 11th में किसी भी माध्यम (CBSE, State Board) के स्कूल में एडमिशन ले सकते हैं।

अक्सर बच्चे 10th के बाद अपना रुख़ NEET के लिए कोचिंग संस्थानों की तरफ़ करते हैं लेकिन कुछ बच्चे कोचिंग की जगह स्कूलिंग को चुनते हैं। यहां इस बात को समझना बेहद जरूरी है कि अगर बच्चे के अंदर यह क्षमता है कि वो एक साथ NCERT और कोचिंग संस्थानों द्वारा दिए गए स्टडी मटेरियल की पढ़ाई कर सकते हैं तो ही उन्हें कोचिंग की तरफ़ बढ़ना चाहिए अन्यथा स्कूलिंग से केवल NCERT पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

दो साल की स्कूलिंग के बाद बच्चे एक साल का ब्रेक लेकर किसी कोचिंग संस्थान में अपना नामांकन करवा सकते हैं जहां की वो NCERT के revision के साथ कोचिंग द्वारा दिए गए स्टडी मटेरियल की भी पढ़ाई कर सकते हैं।
इस दौरान बच्चे को एक अधिक साल अपनी तैयारी के लिए लगाना पड़ता है लेकिन इस में डरने या घबराने वाली बात नहीं है

परीक्षा में नामांकन की उम्र सीमा  

NEET के परीक्षा में नामांकन की उम्र सीमा 25-30 साल तक है और यह एक national level competition exam है तो हर वर्ष लगभग 14,00,000 – 15,00,000 छात्र छात्राएं इस परीक्षा में सम्मिलित होते हैं। तो तैयारी में यदि एक या दो साल अधिक लग रहे हैं तो कोई हताश होने वाली बात नहीं है।

12th में ओवरऑल मार्क्स                

NEET की परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए 12th में ओवरऑल मार्क्स 60% एवं प्रत्येक विषय (physics, chemistry, biology) में पास होना अनिवर्य है।   

NEET परीक्षा कुल कितने अंक की होती है ?

NEET UG की परीक्षा कुल 720 अंक की होती है जहां 180 प्रश्न (45-physics,45-chemistry,45-botany,45-zoology) के होते हैं। हर प्रश्न के सही उत्तर पर +4 अंक और ग़लत उत्तर पर -1 दिए जाते हैं, और किसी भी अच्छे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में नामांकन पाने के लिए औसतन 600 अंक की आवश्यकता होती है। रिज़ल्ट आने के बाद चयनित अभ्यर्थियों की काउंसलिंग की जाती है। मेडिकल कॉलेज की काउसलिंग एक से अधिक चरणों में की जाती है, जहां छात्रों को उनके प्राप्त किए हुए अंको के आधार पर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिलता है। छात्रों को उनके डोमिसाइल राज्य में 85% रिजर्वेशन दिया जाता है साथ ही जाती के आधार पर भी रिजर्वेशन दिया जाता है।

NEET के बाद                                                         

• MBBS (Bachelor of Medicine & Bachelor of Surgery) की अवधि 5 वर्ष 5 महीने की है जिसमें विभन्न प्रकार की बीमारी और उसकी दवाइयों के बारे में जानकारी दी जाती है।

BDS(Bachelor of Dental Surgery) की अवधि 5 वर्ष की होती है जिसमें की डेंटल की पढ़ाई होती है।

• AYUSH (The Ministry of Ayurveda, Yoga & Nephropathy, Unani, Siddha and Homeopathy) की अवधि 4 वर्ष 6 महीने की होती है जिसमें आयुर्वेद की पढ़ाई होती है।

इंडिया में कुल 66,000 MBBS और BDS के seats हैं।82926 MBBS seats, 26949 BDS, 1205 AIIMS , 200 JIPMER,52720 AYUSH.

(**वर्ष 2020 से NTA के फ़ैसले के मुताबिक NEET, AIIMS & JIPMER सभी परीक्षाएं NTA द्वारा आयोजित किया जाएगा और भारत में मेडिकल के क्षेत्र में यह बहुत बड़ा कदम है जहां “one nation one examination” का आयोजन होगा और अब ये केवल NEET के नाम से जाना जाएगा।)

Top 5 NEET  कोचिंग संस्थान और फ़ीस

Courses  Duration Eligibility  Teaching Hours Per Day Admission Mode Fees ₹ 
Regular Course for NEET 1 Year XII Studying / Passed Students 4-5 hours Direct admission and ACST 1,36,000
Courses  Duration Eligibility  Teaching Hours Week Admission Mode Fees ₹ 
Leader 1 Year XII appeared / passed 20-25 hours Direct admission 1,02,000
Courses  Duration Eligibility  Teaching Hours Per Day Admission Mode Fees ₹ 
Test and Discussion Program 1 Year XII passed Students 38,000
Courses  Duration Eligibility  Teaching Hours Admission Mode Fees ₹ 
Sampoorn and Safal 1 Year XII passed/appeared 5 to 6 lectures per subject per week ResoNET 99,000
Courses  Duration Eligibility  Teaching Hours Per Day Admission Mode Fees ₹ 
Genome 1 Year XII passed 1.5 hours 82,000

 

* ये फीस सिर्फ 12th पास के बच्चों के लिए हैं, दूसरे बच्चे फीस की अधिक जानकारी आप सीधा कोचिंग संस्थानों से ले सकते हैं
अगर जानकारी अच्छी लगी तो शेयर जरूर करे,

आपके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं
Good Luck!

आगे आने वाले टॉपिक…

एयरक्राफ्ट इंजीनियर कैसे बने      एयरक्राफ्ट पायलट कैसे बने    एयरहोस्टेस कैसे बने

मर्चेंट नेवी कैसे जॉइन करे            NDA कैसे जॉइन करे             एयरफोर्स कैसे जॉइन करे

Continue Reading डॉक्टर कैसे बने और कैसे करे NEET की तैयारी,

प्यारा सजा दरबार मां तेरे भवन में आऊं
देखूं मूरत में तेरी चरणों में शीश झुकाऊं
लाल चुनरिया तूने हैं डाली
गालों में तेरे चमके हैं लाली
सिर पर सजाया मुकट है तेरे भवन में आऊं

प्यारा सजा दरबार मां तेरे भवन में आऊं
देखूं मूरत में तेरी चरणों में शीश झुकाऊं

आंखें तेरी लगती है प्यारी
सिंह कि तेरी है सवारी
अष्ट भुजाऐं भरी हैं तेरे भवन में आऊं

प्यारा सजा दरबार मां तेरे भवन में आऊं
देखूं मूरत में तेरी चरणों में शीश झुकाऊं

पांव में पायल तेरी बजी हैं
माथे बिंदी मां के सजी है
कानों में कुंडल सुहाये तेरे भवन में आऊं

प्यारा सजा दरबार मां तेरे भवन में आऊं
देखूं मूरत में तेरी चरणों में शीश झुकाऊं

तू हैं माता जग की जननी
बिगड़ी सब की तुझ से बननी
झोलियां भर दे सब की तेरे भवन में आऊं

प्यारा सजा दरबार मां तेरे भवन में आऊं
देखूं मूरत में तेरी चरणों में शीश झुकाऊं
Continue Reading

सिंह में सवार होकर
त्रिशूल हाथों में लाना

कर के सोलह श्रृंगार माँ
लाल चुनरी ओढ़ आना

लगा के केशरी टीका माथे पर
चंदन कुमकुम सी महक जाना

चलकर तू उस हिमालय से माँ
इस बार बस मुझ से मिलने आना

सजाया है मैंने दरबार तेरा
तू आ कर माँ बस विराज जाना

मै लगाऊ पंचमेवा मिश्री भोग तुझे
तू चख कर मेरी लाज बचाना

तू बसी रहना मेरी आंखों में पल पल
और मुझे सदा अपनी चरणों से लगाना
Continue Reading

आज मां आईं है
खुशियां संग लाई है

हो के नन्दी में सवार
मन मंदिर में उतर आईं है

सजा हुआ है तिलक माथे पे
कानों में कुंडल लगाई है

सोहना रूप मां का लगता प्यारा
एक हाथ में कमल दूजे में त्रिशूल उठाई है

हाथों में खनका के कंगन
सिर पे सोने का मुकुट सजाई है

तेरे चरणों में हुआ हूं नतमस्तक आज
मेरे सामने जो खड़ी शैलपुत्री महामाई है
Continue Reading

तेरे नूपुर की सुन झनकार
भई दीवानी राधा रानी

ऐसा उलझा प्रेम का धागा
जैसे कोई प्रीत पुरानी

जुवां जुवां अब सब कहे
मोहन हमरी प्रेम कहानी

तेरे नैनों के पटलों में
अब बीती जाये मेरी जवानी

मैं बनू बांसुरी तेरे प्रेम में
तू दे दे मुझको मधुर रागनी

मैं तेरे अधरों में धरूँ मुस्कान
तू बन जाना मेरे आंखों का पानी

तेरे नूपुर की सुन झनकार
भई दीवानी राधा रानी

हाँ ! मोहन हमरी प्रेम कहानी.......
Continue Reading

अवध आज राम जी मेरे आयो
चतुर्भुज रूप क्या खूब सुहायो

होठों से मंद मंद मुस्कायो
हाथों का तीर आंखों से चालायो

रच के श्रृष्टि सारे जग की
तु ही भव सागर पार करायो

तु ही दयाला तु ही कृपाला
कण कण में तू ही तो समायो

तेरे इशारे से चलता है जग
तु ही परम परमेश्वर कहलायो

अवध आज राम जी मेरे आयो
चतुर्भुज रूप क्या खूब सुहायो
Continue Reading

हर रिश्तों की आजमाईश तू चलते हुये आ गया
तु तो राम है !,खुद रच के सृष्टि खुद ही नंगे पावँ आ गया

बन के राजकुमार हुआ था प्रकट महलों में
कुछ रिश्तों के खातिर जंगलों में भटकते आ गया

होकर नतमस्तक धर लिये थे सारे कष्ट तुने
पकड़ डोर मर्यादा की कितने वचनों की लाज़ बचा गया

जो मिले फिर तुझे तुझ जैसे कष्टहारी उस पथ पर
छू कर पावँ से फिर पत्थर और पत्थर से नारी बना गया

जो दिखी तुझे भक्ति उस की जो व्याकुल थी तेरे इन्तज़ार में
खुद खाकर तूने जूठे बैर उसकी जन्मों की भूख मिटा गया

डोलता रहा तू खुद पत्थरीले पथ पर मर्यादा हाथों में लिये
बैठ काठ की नाव में उस नाविक को भव-सिंधू पार लगा गया

हर रिश्तों की आजमाईश तू चलते हुये आ गया
तु तो राम है !,खुद रच के सृष्टि खुद ही नंगे पावँ आ गया

श्री राम 💓💓
Continue Reading

मधुमास महीने में जो तूने दर्शन दिए हैं
देख तेरी छब को हम मनमोहित हुए हैं

सिर पे सूरज सुहाए हाथों में कमंडल उठाए
तेरी मुस्कान से मां कूष्‍मांडा भूमंडल मुस्काए

जल के अग्नि में तूने जो काया जलाई
महादेव से अपनी पावन प्रीत निभाई

हिमालय पर्वत के घर तू पार्वती बन आईं
कभी दुर्गा कभी काली कभी सती मां कहलाई

धाम की सूरज की किरणे तूने धरती पर बरसाई
तुझे मेरा बारम्बार प्रणाम हे मां माहामाई

मधुमास महीने में जो तूने दर्शन दिए हैं
देख तेरी छब को हम मनमोहित हुए हैं
Continue Reading

जय मां चंद्रघंटा, जय मां भवानी
तू जग की दाती मां, तू ही जग कल्याणी

दस हाथ तेरे, हर हाथ सुशोभित है
सोने सा रूप तेरा, जिस में जग मोहित है

दुष्टों का करती नाश, तू अति बलशाली है
तू जग पावन मां, तेरी सान निराली है

तेरी भक्ति में हैं शक्ति, तू अज़र अमर अभिनाशी
तेरे होने से ही खिलती धूप, तू अनमिट पूर्णमाशी

जय मां चंद्रघंटा, जय मां भवानी
तू जग की दाती मां, तू ही जग कल्याणी
Continue Reading

दीये जन्मदिन के हम जलायेंगे
अपने हाथों से तुम्हारा केक कटायेंगे
डूबोकर तुम्हें इस कदर मस्ती में
दोस्त ! तुमको शैंपेन पिलायेंगे
Happy Birthday 🎂🍾🥂
Continue Reading

इस जन्म का प्यार अपना
सात जन्मों तक चलता रहे

दीया तुम्हारे जन्मदिन का
हर बरस यूं ही जलता रहे
Happy Birthday 🎂💕
Continue Reading

हाथ उठे हैं दुआ में आपकी
बस हर ख़ुशी मिल जाये

आप के अरमानों की चादर
कामयाबी के धागों में सिल जाये
Happy Birthday Hubby🎂🥰
Continue Reading

जो मैं बनूं नंद किशोर
तू बन जाना राधा सी

नित निहारू मैं तुझे
बन कर तेरा ब्रजवासी

तू आना सोलह श्रृंगार में
आंखे तेरे दर्शन की प्यासी

मेरे नाम से पहले नाम तेरा लें सब
ये सखी सहेली हरी बंसी हरी दासी

मैं लिपटा रहूं चंदन पे सर्प सा
तू ही मेरी मथुरा तू ही मेरी काशी

जो मैं बनूं नंद किशोर
तू बन जाना राधा सी
Continue Reading

तू मीरा सी मुहब्बत रखना
मैं श्याम सा श्यामल हो जाऊं

तू मुझे कण कण में ढूंढ़े
मैं तेरी रूह में सामिल हो जाऊं

तू जो रिझाए पल पल मुझको
मैं आठों पहर तेरे दर्शन पाऊं

तू भगवा रंग में बनी जोगन सी
मैं रंगू तुझ में और तुझ सा हो जाऊं

तू ढूंढ़े खुद को मुझ में और मैं खुद को तुझ में
तेरी वीणा से अपनी बांसुरी के सुर मिलाऊं

जुड़ी हो मेरी सांसों की डोर तेरी सांसों से
मैं जन्मोंजन्म ये भक्तिमय प्यार निभाऊं

तू मीरा सी मुहब्बत रखना
मैं श्याम सा श्यामल हो जाऊं
Continue Reading

कितने काम अधूरे रह गये
ये ज़िंदगी तेरी राहों में

मत तड़पा तू मुझ को ऐसे 
भर ले आ के बाहों में।

कितने काम अधूरे रह गये
उन खेत और खलिहानों में

कर दे पूरे सब काम अधूरे
मत तोल तू मुझ को पैमानों में।

कितने काम अधूरे रह गये
इस रंग बदलते संसार में

मत कर मलाल सब हैं मुसाफिर
इस ज़िंदगी और मौत के दरबार में।
Continue Reading

खुशियों की सरगम से
जीवन के सुर सजाते

अगर तन्हा छोड़ हमें
तुम यूं दूर ना जाते।

ज़िंदगी के सफर में
होता साथ तुम्हारा 

दिल से दिलों की हम 
प्रीत सदा निभाते।

संग चलते हम तुम्हारे
इस ज़िंदगी के मेले में

फिर ठहर के दो पल कहीं
प्यार के मायने बताते।
Continue Reading

ले लो, ले लो झूमर बिंदी और चूड़ियाँ
आके देख लो क्यौं हैं ये दूरियाँ 

पहली बार तुम्हारे गावँ में आया हूँ 
सुहाग की चूड़ियाँ तुम्हारे लिए लाया हूँ।

पाँव की है पायल कान का है झुमका
मस्त हो कर आज तुम लगाओ ठुमका।

बच्चों के लिए भी कुछ खेल खिलोने लाया हूँ 
एक बार देख लो बहुत दूर से आया हूँ। 

आज आया हूँ तुम्हारे गावँ कल जाऊँगा उस पार
तुम्हारी भोली सूरत देख सब दे दूँगा उधार।
Continue Reading

कुछ बूढ़े थे, थे जवान भी
और कुछ थे नन्हे नन्हे से

मिल गये वो आसमानी तारों में
ज़ुदा हो गये जीवन के लम्हे से

ये उमर थी उनके जीने की
वो चल दिये कोरोना के काल में

कांपी है ये धरती सारी
देखो मानव खड़ा है किस हाल में

ये देह जब उन्होंने त्यागी होगी
तब हर मानव घबराया होगा

जब छीनी होंगी सांसे उनकी
कोरोना तूने खूब तड़पाया होगा

मिले आत्मा को शान्ति उनकी
और परम धाम ही मिले उनको

जो खो चुके हैं जीवन अपना
मेरा शत् शत् नमन उनको।
Continue Reading

ना कर तेरा मेरा
एक दिन सब मिट्टी हो जाता है

रह जाता है यही सब
क्यौं तू मोह माया के

बीज बो जाता है।
तू मरता रहा पल पल

जिन अपनों के लिये 
वो तेरी अर्थी पर आके

दो आँसू रो जाता है
ना कर तेरा मेरा

एक दिन सब
मिट्टी हो जाता है।

ये कहकशाँ ये
महफिलें तू सजाता रहा

पर आखिरी सांस में
इंसान अकेला सो जाता है

सत्कर्म कर सत पथ पर चल
क्यों झूठी शान

मोह माया में खो जाता है।
ना कर तेरा मेरा

एक दिन सब मिट्टी हो जाता है।
Continue Reading

वो दिन थे सुहाने
जब हम थे दीवाने

सुबह सुहानी 
शाम रंगीन थी

कदमों में आसमाँ 
सर पर जमीन थी

डगमगाते थे कदम 
ज़िंदगी हसीन थी

साथ तुम होते थे
मन होता था चंचल

देख तुमको घड़ी भर
दिल में होती थी हलचल

पर अब तुम नहीं
आँखें मेरी नम है

खामोशियां हैं लफ्जों में
दिल में धड़कनें कम है

लौट आओ मेरे यार
दे दो वही पहला सा प्यार।
Continue Reading

वो मेरा मिट्टी का घर 
मेरे आंगन की चारपाई

वो पीपल का पेड़ 
फिर चलती पुरवाई 

वो फूलों का बगीचा
और लह-लहाते खेत 

वो मिट्टी की क्यारी
फिर नदी की रेत

वो कुएँ का पानी
मिट्टी की सुराही

पीता था आ कर
वो चलता हुआ राही 

वो गाँव के मेले 
सावन के झूले

वो सर्बत का गोला
और चाट के ठेले

याद करता हूँ अब भी
उस मिट्टी के घर को

उस प्यारे सफर को
उस मीठी डगर को
Continue Reading

इस छोटे से सफर की
बस तुमसे इतनी सी जुस्तजू थी

की जब आँगन में 
धूप की किरणें पड़े 

तो सामने चेहरा तुम्हारा हो
इस छोटे से सफर की

बस तुमसे इतनी सी जुस्तजू थी
की दोपहर की धूप में

जब पावँ झुलस जाएं
तो शीतल नर्म मुलायम

साथ तुम्हारा हो
इस छोटे से डगर की

बस तुमसे इतनी सी जुस्तजू थी
की जब चाँद फलक पर आये

और ठंडी ठिठुरती हुई रात में
मेरे सिरहाने में

हाथ तुम्हारा हो 💕
Continue Reading

मैं बनकर हिना पिसूं पत्थर पर
तेरे हाथों से लग जाऊँ 

बन कर काजल तेरे नयनों का
तेरे आसूंओं से लिपट जाऊँ 

माँग मैं भर दूँ तेरी कुमकुम से
माथे में बिन्दीया सी सज जाऊँ 

पैरों के पायल और बिछुवे बन
हाथों में चूड़ी कंगन सा खनक जाऊँ

नाक की नथनी कानों की लटकन
बालों में गजरा सा महक जाऊँ 

बनू ओढ़नी चुनर और ढक लू तुझे
फिर मंगलसूत्र सा तेरे गले से उलझ जाऊँ 

जो देखन को तू पकड़े छननी हाथों में 
मैं स्वयं ही चाँद सा फलक पे लटक जाऊँ 

ले के हाथों में प्याला जल का
तुझे मैं पहला घूँट पिलाऊं

लम्बी उमर तो तेरी हो "जाना"
आज तेरी उमर से अपनी उमर मिलाऊ

इस करवा चौथ पर "जाना"
तुझे मैं ऐसा श्रृंगार कराऊ
Continue Reading

माना कि मैं इक खुबसूरत
किताब भी नहीं हूँ 

तुम मुझे रद्दी समझ कर
ही आस पास रख देना

पड़ा रहूँगा निस्वार्थ ही मैं
तुम्हारे दिल के किसी कोने में

झाड़ के धूल कभी अपने हाथों से
कुछ पन्नों को पलट देना 

मिल जायेगें तुम्हें तब कुछ अंश
मेरी यादों के उस किताब में

करना महसूस मुझे और मेरी
याद में इक आँसू गिरा देना

उस किताब में दर्ज होगी मेरी
मुहब्बत की कुछ कहानियाँ 

थोड़ी सी फ़ुरसत निकाल वो
कहानी अपने दिल को सुना देना

होंगी मुझ में ही कुछ कमियाँ
इंसान जो ठहरा 

पर दो चार ही सही कुछ
ख़ूबियाँ मेरी भी गिना देना

तुमने पूछा था कभी क्यो करते
हो इतना प्यार मुझ से ?

उस यादों की किताब में ढूंढ
कर वो जवाब खुद को दिखा देना

मैं जीवन सारा खुद का अब
कर रहा हूँ समर्पित तुझ को

दूर रह कर ही सही तुम इस
सफर का साथ निभा देना
Continue Reading

हम ने वादा किया है उन से
अब मिलेंगे उम्र के उस पड़ाव में

ना पुछेगा फिर कोई जाति-धर्म
और हम ना होगे किसी दबाव में

होगा चस्मा होगा आँखों में
लाठी होगी हाथों में

लडखडाहट होगी बातों में
मुस्कराहट ना होगी दांतों में

कमर होगी झुकाई सी
सूरत होगी मुरझाई सी

आँखें होंगी अलसाई सी
तब पूछेंगे तुम से हम

कितना प्यार करते हो "जाना"
उम्र की उस दहलीज में देखो 

फिर ना तुम झूठ बोल जाना
कह देना साफ साफ मुझ से

क्या पता उसी वक़्त मेरा
खत्म हो जाये ये सफ़रनामा।
Continue Reading

नित-नित तेरे खवाबों की
दहलीज़ पे आऊँ

भोर होने से पहले हर रोज
तेरे दर्शन पाऊँ

लिपटा रहूँ चंदन पे सर्प सा
पल पल तेरी खुशबू पाऊँ

तू बन जाना मूरत प्यार की
जब जब तुझे रिझाऊँ

ये पवित्र रिश्ता बन्धन जन्मों सा
धड़कनों में अमर कर जाऊँ

हर मंज़र पर हो विराजमान तू
मैं जहाँ देखूं बस तुझे पाऊँ

तुझ से जुड़ी हो हर पहर मेरी
तेरे नाम को सारे सुर दे जाऊँ

नित-नित तेरे खवाबों की
दहलीज़ पे आऊँ

भोर होने से पहले हर रोज
तेरे दर्शन पाऊँ।
Continue Reading

मैं इक नन्ही सी कली थी
अपने ही रंगों में ढली थी

हँसता खिलता था बचपन मेरा
मैं बड़े ही नाज़ों में पली थी

ना मुझे फ़िकर थी जमाने की 
वो उमर मेरी कितनी भली थी

अल्हड़ अठखेलियां थी बातों में
मैं तो अपने ही धुन में चली थी 

चाँद सितारों को छूने की जिद्द मेरी
आश्माँ की चादर भी खुली थी

मेरे बचपन की नादानीयों में
माँ-पापा की मुहब्बत घुली थी

पर अब जहाँ जाती हूँ
मुझे बस हैवान नज़र आते हैं

और देख उनकी हैवानियत को
मैं डरकर सहम जाती हूँ। 
Continue Reading

कुछ मर्द रुपी जानवर 
मेरे शहर में भी बसते हैं,

उतार कर प्रतिष्ठा इक नारी
हवस लिये चलते हैं,

बन के राजा बेटा खुद
इक रानी बेटी को डसते हैं।

कुछ मर्द रुपी जानवर 
मेरे शहर में भी बसते हैं।

लानत है एसी मर्दानगी पर
जो अपने सीने में रखते हैं,

अपनी हवस मिटाने को
माँ बहनों पे गंदी नज़र रखते हैं,

कुछ मर्द रुपी जानवर 
मेरे शहर में भी बसते हैं।
Continue Reading

जिस पथ पर तू चले
मैं बन के फूल बिखर जाऊँ 

तेरे चरणों को छू कर फिर
कुछ पल जीयूॅं या मर जाऊँ 

इक बार जो तू छू ले मुझे
मैं फिर से ज्यों महक जाऊँ 

कटीले कंकड़ है राह में
मैं तेरे लिये सब सह जाऊँ

तू पथिक रहे रोशन सदा
और मैं मोम सा बह जाऊँ 

जिस पथ पर तू चले
मैं बन के फूल बिखर जाऊँ 
Continue Reading

ले चल परली पार प्रिये
कर दे तू उद्धार प्रिय।

उलझ गया हूँ तुझ से मैं
बेरंग लगे अब संसार प्रिय।

भटका हूँ तेरी आँखों में
मीठी नैनों की कटार प्रिय।

थाम के मेरा दामन तू
भंवर से मुझको उभार प्रिय।

लग के मेरे सीने से फिर
सम्पूर्ण कर दे मेरा प्यार प्रिये।
Continue Reading

चलो इक पेड़ लगाते है
धरा को खुशहाल बनाते है

फिर इक चलता राही आयेगा
जो चलते चलते थक जायेगा

उसी पेड़ की छाँव में आ कर
मन को शीतल कर जायेगा

देख हरी-भरी धरा को फिर
वो मंद-मंद मुस्कायेगा

हृदय होगा हर्षोल्लित उसका
जब पेड़ की ओर नज़र उठायेगा

जो लगे होंगे फल-फूल उस पे
थोड़ा चख कर भूख मिटायेगा

उसी पेड़ की छाँव के नीचे
हमें लाख दुआएँ दे जायेगा

चलो इक पेड़ लगाते है
धरा को खुशहाल बनाते है
Continue Reading

लापता हूँ कब से मैं उन पलों के दरमियां
जो बिताये थे कभी साथ में।

याद है अब भी जाड़ों में वो घंटों तलक बतियाना
उस सर्द मुलायम रात में।

ये पल छिन ऋतु महीने बरखा बहार
अब भी होते हैं पर तुम नहीं होती साथ में।

लापता हूँ कब से मैं तुम्हारी उन नर्म मुलायम साँसों में
जो घोल दिये थे तुमने मेरे जज्बात में।

वो तीज त्यौहार सावन के झूले लगते हैं हर बरस
पर तुम नहीं होती हो उस सावन की बरसात में।

तुम्हारी आवाज़ गूंजती है अब भी मेरे कानों में
और मैं लापता हूँ कब से तुम्हारे उन्हीं ख्यालात में।
Continue Reading

चट्टानों से गिर कर मैं सागर में आ जाती हूँ 
इतना गिरने के बाद भी हर दिल को भा जाती हूँ।
कल कल की आवाज में प्यारे गीत सुनाती हूँ 
चट्टानों से गिर कर मैं सागर में आ जाती हूँ।

पत्थरो से टकरा कर दिल जख्मी है मेरा
फिर भी लाखों की प्यास बुझाती हूँ।

कब मिलेगा इन वादियों का हमसफर मुझे
यही सोच-सोच कर घबराती हूँ।

लाख गम हैं दिल मेरे, फिर भी
उछलती कूदती और मुस्कराती हूँ।

चट्टानों से गिर कर मैं सागर में आ जाती हूँ 
सागर ही मंज़िल मेरी सागर ही कारवां 

बस सागर में ही समा जाती हूँ।
गिर कर उँचे झरनों से अपने अस्तित्व को खोती नहीं

एक सुन्दरता हर बार मैं ला जाती हूँ।
ना जमीं ना आसमाँ ना ही कोई फरिस्ता हूँ 

मैं तो बस चट्टानों से गिरती हुई एक नदी हूँ
सागर ने ही समाया मुझे अपने अन्दर 

बस उसी के एहसान तले दबी हूँ। 
Continue Reading

देखो मुझे मैं आज भी उसी राह पर खड़ा हूँ 
जहाँ से हमारी राहें विभाजित हुई थी

कुछ अधूरे सपने लिये
कुछ टूटे ख्वाब लिये

और कुछ अनगिनत सवाल लिये।
अब भी दिल सोचता है तो थोड़ा सहम जाता है

कि क्या प्यार कभी साथ नहीं रह सकता ?
क्या वो शख्स जिस से हम बेइन्तहा मुहब्बत करते हैं

वो दो कदम साथ नहीं चल सकता है ?
बिना कुछ सोचे समझे निस्वार्थ ही

बिना कुछ पाने की लालसा लिये
बस यूँ ही कदम से कदम मिला कर

कभी सूरज की किरणों के तले
तो कभी चाँद और चान्दनी की छाँव में।

ताकी ये प्यार इक दूजे की रूह से लिपटा रहे
क्या तुम ताऊम्र के लिये मेरे नहीं हो सकते

शायद नहीं बिलकुल भी नहीं
पर मैं तुम्हारा हमेशा रहूँगा।

इस जन्म में भी और आगे भी

माना तुम साथ नहीं होंगे 

पर तुम्हारी आवाज़ तुम्हारा चेहरा
Continue Reading

सौ जन्मो का साथ अपना
साँस का धड़कन के जैसे

आस का जीवन के जैसे
बादल का गगन के जैसे।

थामो तुम हाथ अपना
श्याम की जोगन के जैसे

हाथ में कंगन के जैसे
प्यास में सावन के जैसे।

सौ जन्मो का साथ अपना
रूप का दर्पन के जैसे

भक्त को भगवान के जैसे
मंत्र का हवन के जैसे।

खुशबू का मधुबन के जैसे।
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कभी चले आओ हमारे गाँव में
दोनो बैठेगें फिर पीपल की छाँव में।

उंचे नीचे हैं पर्वत पथरीले हैं रास्ते
चलना सम्भल कर कांटा ना चुभ जाये पावँ में।

जब आओगे तुम तो प्यार भरी बातें होंगी 
हाथ में हाथ लिए बैठेगें दोनो फिर नाव में।

कभी चले आओ हमारे गाँव में
दोनों बैठेंगे फिर पीपल की छाँव में।
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मैं मेरी कविताओं सा सरल हो जाऊँ
तू फिर पढ़े और मैं समझ आ जाऊँ।

मेरा हर इक लफ्ज़ छू जाये तुझे
और मेरी कविताओं में तेरा अक्श नज़र आये तुझे।

मैं तुझे वर्णमाला समझ अपनी कविताओं में पिरोता रहूँ
तेरे नाम को मोतियोँ की माला समझ फिरोता रहूँ।

मै खुद की कलम हूँ और तू कलम की स्याही है
तुझ बिन मेरा चलना अब दो कदम भी क्या ही है।

मै आज हूँ सायद कल चला जाऊँ संसार से
पर मेरी कविताओं में तू रहेगी हमेशा प्यार से।

जो किया है वादा मुझ से उसे तुम निभा देना
अगर याद आऊँ मैं,अपने मन को मेरी कविता सुना देना।

मैं मेरी कविताओं सा सरल हो जाऊँ
तू फिर पढ़े और मैं समझ आ जाऊँ।
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मैं तप्ता हुआ मरुस्थल हूँ जाना
तू ठंडी छाँव छबीली है

मैं कौवे सा कर्कश हूँ जाना
तू कोयल कोई सुरीली है

मैं बंजर सा जमीं हूँ जाना
तू लहराती सरसों पीली है

मैं घनघोर सा अंधेरा हूँ जाना
तू चमकीली किरण उजली है

मैं समंदर सा खारा हूँ जाना
तू लहरों सी अलबेली है

मैं तप्ता हुआ मरुस्थल हूँ जाना
तू ठंडी छाँव छबीली है
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तुमने इक बार भी नहीं सोचा
जब गये थे मुंह मोड़ कर
तन्हा मुझ को छोड़ कर।
मैं बैठा रहा घंटों उसी जगह
की तुम आओगे वापस 
पर तुमने इक बार भी नहीं सोचा।

वो गलियाँ वो चौबारा 
जहाँ होती थी मुलाकातें तुमसे
अब हुयी हैं सुनसान वो राहें मेरी
तुमने इक बार भी नहीं सोचा।

वो होली के रंग दिवाली के दिये
और अब जिन्दगी मेरी
हुयी बेरंग बुझ गयी रोशनी
तुमने इक बार भी नहीं सोचा।

वो चांदनी रातों में चाँद को ताकना
रख के तेरा सर सीने पर अपने
अब चाँद तारों तक नज़र नहीं जाती
तुमने इक बार भी नहीं सोचा।
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पास आजा यार
गले से लग जा यार

दिल करने लगा तेरी फ़रमाइश
तू इस में समा जा यार।

तेरी मीठी बातों में दिल घुलने लगा
तू दो-चार लफ्ज़ सुना जा यार

अब दिन ना मेरा तेरे बिन ढलता है
तू मेरी शामों को महका जा यार।

लिपटा रहूँ तेरे जिस्म से
तू अपने जिस्म ए अर्क में
डुबो जा यार।
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जो है उस में खुश रहना है
तुम्हारा भी अब ऐसा ही कुछ कहना है

दर्द लिये बैठे हैं दिल में
और अश्कों का मोती बन बहना है।

सामने खड़ी है मंज़िल पर राहें मुमकिन नहीं
हमे तो अब बस चलते ही रहना है

पावों में छाले भी होंगे इस राह ए इश्क में
अब सब हमे खुद ही सहना है।

तुमने समझाया बहुत कि
हमारा ना होगा मिलन 

दिमाग तो समझ गया पर
बोलो दिल को कैसे समझना है।

किया है वादा हम ने
खुद से भी और तुम से भी

की ता-उम्र अब हमको
तुम्हारा ही रहना है।

तुम नहीं तो जिन्दगी में
हम थोड़ा मायूस हो जायेंगे

पर तुम्हारे नाम के सहारे
पूरी जिन्दगीं जी जायेंगे।
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तुम बदल गये या हालात बदल गये
अब वो पहली सी बात नहीं रही।

वो पहली सी मुलाकात नहीं रही
वो तुम्हारी मेरी बातों में लिपटी रात नहीं रही।

याद करोगे इक दिन जब हम नज़र ना आयेंगे
मेरी बातें मेरे अल्फाज़ तुम्हे सताएंगे।

कुछ तो खूबियाँ मुझ में भी रही होंगी
जो तुम्हें हर पल अहसास मेरा करायेंगे।

माना ये सफर छोटा था तुम्हारा मेरा
मगर कुछ आधे अधुरे शब्द तुम्हारे कानों में दोहराएंगे।

तुम जितना भी मसरूफ हो जाओगे जीवन में अपने
पर हम हर पल तुम्हारी यादों से उलझे नज़र आयेंगे।
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तेरे इश्क़ पे "जाना" मैंने अपना दिल हारा है
दिल जान जिगर सब कुछ तुझ पे वारा है।

अजब सी हलचल है अब धड़कनों में मेरी 
तू ही अब मेरी हमदम यार दिलदारा है।

तेरे इश्क़ में हाल कुछ येसा है हमारा 
सर पे जमीन पावोँ में आसमाँ सारा है।

तुम्हारी ख्वाहिशें तुम्हारी जुस्तजू
और जुबाँ पे अब लफ्ज़ भी तुम्हारा है।

माना कि कुछ दीवारें है दरमियां हमारे 
पर सारी उम्र अब इन्तज़ार तुम्हारा है।
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मैं टूटता हुआ तारा बन जाऊँ 
तुम खुद की मन्नत सी बन जाना।

मैं खँडहर सी इक दीवार बन जाऊँ 
तुम खुद की जन्नत सी बन जाना।

मैं सूखा हुआ पेड़ बन जाऊँ
तुम बसंत बहार सी बन जाना।

मैं जलती हुयी बदरा बन जाऊँ
तुम सावन की फुहार सी बन जाना।

मैं सूखा हुआ कुआँ बन जाऊँ
तुम लहराती दरिया सी बन जाना।

मैं नीम सा कड़वा बन जाऊँ
तुम चंदन सी महक जाना।
मैं नागफनी सा कटीला बन जाऊँ
तुम छुई-मुई सी बन जाना।

मैं घोर रात अमावस की बन जाऊँ
तुम चांदनी रात सी चमक जाना।
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मेरे बाँके बिहारी ! मुझ में कुछ ऐसा भर देना
मुझे पानी सा शीतल समन्दर सा शांत कर देना।

ना देना मुझे धन दौलत और संसार की झूठी माया
मै बस तुझको देखूँ तू मुझको देखे कुछ ऐसा कर देना।

तेरे चरणों में झुका रहे शीश फिर मेरा हरदम
अपनी मोहनी छवि से तू प्राण मेरे हर देना।

तेरा मोर मुकुट तेरा पीला पटका तेरा श्याम वर्ण 
अपनी बाँसुरी की ध्वनि मेरे रोम रोम में भर देना।

मेरे बाँके बिहारी ! मुझ में कुछ येसा भर देना
मुझे पानी सा शीतल समन्दर सा शांत कर देना।
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ये ज़िंदगी क्या है ? एक सूखा
हुआ पेड़ ही तो है
जो एक हवा का झोंका आये
और गिर जाये

क्योंकि इक ना इक दिन
सब को ही इस ज़िंदगी की
रेलगाड़ी से
उतर का चाँद सितारों में खो
जाना है

अब जाना ही है इक दिन तो
क्यों न कुछ ऐसा किया जाये
जब हम इस दुनियां से 
अलविदा ले रहे रहे होंगे
उस वक़्त हर इक की
आंखों में आंशू हो 

और जुवां पर शब्द हो
कि यार कुछ भी कहो
इन्शान बहुत अच्छा था,
ज़िन्दगी बहुत छोटी है बस इस को बड़ा कर के जियो.....
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झूमर बन
बालों में लटकता रहूँगा

बिंदिया बन 
माथे में चमकता रहूँगा

काज़ल बन
आँखो में सजता रहूँगा

झुमका बन
कानों को चूमता रहूँगा

नथनी बन
गरूर तेरा बनता रहूँगा

लाली बन
होठों को रंगता रहूँगा

मंगलसूत्र बन
सीने की धड़कन सुनता रहूँगा
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ज़रा सी बात थी, और वो रेत से फिसल गये
देखते ही देखते रिश्ते सारे बदल गये

यूँ लगा बैठे वो ज़रा सी बात को दिल से
शाम -ए-मुहब्बत में सूरज से ढल गये

उनकी बेरुखी का आलम भी क्या बताये
माह-ए-जून में वो बर्फ से पिघल गये

मलते थे कभी गुलाल वो मेरे गालों पर
आज ज़िंदगी मेरी वो बेरंग सी कर निकल गये

ज़रा सी बात थी, और वो रेत से फिसल गये
देखते ही देखते रिश्ते सारे बदल गये
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मेरे हमसफ़र आओ
इस चांदनी रात में
चलते हैं ख्वाबों की दुनिया में
दे दो हाथ अपना मेरे हाथ में
ए खुदा अब ये रात 
और थोड़ी लम्बी कर दो।
मेरे यार को तुम 
मेरी बाहों में भर दो
ये चाँद सितारे जुग्नू सब
मेरे प्यार के नाम कर दो।
वो टूटता हुआ तारा
मेरी दुआओं का असर
मेरे हाथ में प्यार की लकीरें 
और भी गहरी कर दो।
मेरे हमसफ़र आओ
मेरी धड़कनो में समा जाओ
फिर ये धागे प्यार के खुल ना पाये
तुम मुझ से इस क़दर उलझ जाओ
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माँ जब तुमने मुझे छुआ था
उस छुअन से ही

ना जाने मुझे क्या हुआ था।
एक खून का गोला भर था तेरी पेट में

ना जाने कब तेरी धड़कनों ने
मेरी धड़कनों को छुआ था।

फिर करने लगा था
उछल कूद तेरी ही पेट में मैं 

उस उछल कूद में पता ही ना चला
कब नौ महीने का हुआ था।

फिर तू लायी थी मुझे इस दुनिया में 
और ना जाने कितना दर्द तुने सहा था

एक तरफ तेरी तड़प थी
और एक तरफ मेरी किलकारी।

सीने से लगाया था तुने
और मैं हर्षोलित हुआ था।
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पापा आये सरहद पार से
माँ की आँखें रोई है

तिरंगे में लिपट कर तुमने
सुधबुध अपनी खोई है।

पावन हो गयी धरा मेरी
तुमने जो सीने पर गोलियाँ बोई है

माँ मेरी बेजान पड़ी है
कैसी ये बेदर्द घड़ी है।

माँग का सिन्दूर मिटा है
हाथ की चूड़ियाँ भी टूटी पड़ी हैं

माँ का तो अब हाल बुरा है
बड़ी बहन भी बिलख पड़ी है।

लगी आँखो से असुवन की झड़ी है
पर तेरी सहादत सब से बड़ी है

गर्व है मुझे तुम पर
ये लड़ाई जो तुमने लड़ी है।

मेरी धड़कनों में है खून तेरा,
फिर भी तेरी कमी
मुझे पल पल पड़ी है।
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किस तरह लड़ती रही हो
प्यास से परछाइयों से
नींद से अंगड़ाइयों से

मौत से और ज़िंदगी से,
तीज से तन्हाइयों से

सब तपस्या तोड़ डालो
नारी तुम घुट- घुट कर
जीना छोड़ डालो।

किस तरह लड़ती रही हो
परेशानी और अत्याचार से
उत्पीड़न और बलात्कार से

दहेज़ और ससुराल में प्यार से,
पति के जुल्म और मार से

सब तपस्या तोड़ डालो
नारी तुम घुट- घुट कर
जीना छोड़ डालो।

किस तरह लड़ती रही हो
माँ बाप की दूरी से
मायके की मजबूरी से
समाज में नज़रों की छूरी से,

सब तपस्या तोड़ डालो
नारी तुम घुट- घुट कर
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ये जगमगाती हुई सुबह
क्यौ अन्धेरी रात में ढल जाती है...!!

कितनी खवाईशें जगती हैं हर रोज
और कितनी खामोशियों में बदल जाती हैं...!
Good Night😴
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मेरी आँखों का फ़लक तक पहुच जाना
फ़िर बातों ही बातों में चाँद से उलझ जाना
की चल तू मेरे साथ तुझे में अपने प्यार का चूड़ा बना दूँ
या फ़िर सजा दूँ तुझे उसके बालों में और जूड़ा बना दूँ
शुभरात्रि 🌜💓🌛
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वो चाँद फिर उतर आया है फलक पे
ला के बिठा दो कोई उसको मेरी पलक पे
फिर होता रहे दीदार सब भर उसका
और ख्वाब हो जाये मुक्ममल उसकी एक झलक पे
Good Night😴
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जला के आग मुहब्बत की
लोहड़ी सब मनाएंगे
लेकर परिक्रमा अग्नि की
ढोल भी बजाएंगे 
बाँट कर रेवड़ी मूंगफली गज़क
दिल से दिल मिलाएंगे 

लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनायें 💓
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हम कल फिर मिलेंगे यहीं
जरा जल्दी आना तुम
जरा लम्बा ठहरना तुम
करनी हो तुम्हें जरुरी बात।
जरा हौले से कहना तुम
रखनी हो अधूरी बात
जरा कौने में रखना तुम

जहाँ मिले थे कभी चुपके से
वहाँ चुपके से आना तुम।
जहाँ हुई थी मुहब्बत कभी
फिर अपनी मुहब्बत दिखना तुम

गुनगुनी धूप महकती फुलवरियां
फ़ूलों संग पत्तियों सी आना तुम।
चांदनी रात तारों की पलक पर
और मेरे दरीचों में उतर आना तुम

हम कल फिर मिलेंगे यहीं
जरा जल्दी आना तुम।
जरा लम्बा ठहरना तुम।
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ज़िन्दगी तेरी क़ीमत क्या है 
कभी तू सोने-चाँदी सी लगती है

कभी फिर तू राख माटी सी लगती है
कभी तू सपन सलौने सजाती है

कभी फिर बन दरियाँ आँख से बह जाती है
कभी तू मचलती बहारों सी लगती है

कभी फिर पतझड़ में उजड़ी नज़ारो सी लगती है
कभी तू चंचल शोख अदाओं सी लगती है
कभी फिर जो पूरी ना हो उन दुआओं सी लगती है
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तेरे नाम की पतंग जो आज हवा में उड़ाई है
और तेरी यादों की डोर मेरे हाथों से उलझ
आई है

तुझे तलाशता रहा मैं जमीं पर इधर उधर
पर तेरी तस्वीर पतंग के साथ-साथ आसमां
में नज़र आई है

बात नहीं होती तुझ से अब दिल मेरा मायूस
रहता है

और यादों के इन पलों में आँख मेरी भर
आई है

तू कहाँ होगी कैसी होगी सोच सोच घबराता हूँ 
अपने दिल की दास्तां आज मैने चाँद सितारों
को सुनाई है

मैं चाँद बन फलक पर उतर आऊँगा तुम
झरोखे पर आ जाना

और देखा करूँगा तुम्हें, अब बस यही उम्मीद
मैने लगाई है
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जाके मंदिर तुम मन्नत का धागा बाँध आना
कर के अरदास तुम साथ दोनों का मांग आना।

चन्दन की खुशबू सा महका रहे प्यार अपना
एक दिया तुम दौनों के नाम का जला आना।

जो लटकी होगी घंटी मंदिर में
उसे अपने हाथों से बजा आना।

बेलपत्र, पंचामृत, पंचमेवा का भोग
दोनों के नाम का लगा आना।

जलते हुये हवन कुंड की ले कर परिक्रमा
मेरे प्यार का कलावा तुम अपने हाथ में बाँध लाना।

शिव पार्वती, सीता राम सा हो जीवन का साथ
अपना लेकर हाथ में गंगा जल साथ रहने की

वो सारी कसमें उठा लाना।
जाके मंदिर तुम मन्नत का धागा बाँध आना

कर के अरदास तुम साथ दोनों का मांग आना।
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ये बेरंग हवाएं पूछे हैं
किस ओर तेरी वो प्रीत चली

टूटे टेशू के फूल से
किस ओर तेरी मनमीत चली

लिए अगन फिर विरह की
क्यों दिल में तेरी ये आंच जली

गला रूंधा हैं और आंखें नम
यादों में उसकी जब सांझ ढली

हुई अब पीड़ा नन्हे मन को
क्यों निर्मोही से तेरी ये प्रीत पली

लिए परछाई यादों में
हाय ! उस से तो तेरी प्रीत भली

किस ओर तेरी मनमीत चली......
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लियी है करवट मौसम ने
झुलसे हैं अब पावं देखो

भागे हैं पशु पक्षी सारे
उस घनी पीपल की छावं देखो

सूर्य देव बरसाये गर्मी
माँ गंगा भी सुखी जाये

मरु भूमि बनी है धरती
हे मानव तू जिस ओर जाये

ये सूखी धरा हरी हो जाती
जब मानव तू पेड़ लगाये

कर संकल्प लगा दे पेड़
आगे की पीढ़ी तेरे गुणगान गाये।
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मेरी दुवाओं में
तुम्हारी ही अर्ज़ियां हैं

लिपटी उन में
कान्हा की मर्ज़ियां हैं

तुम्हारी सब राहें
सफ़ल सुगम हो जायें

राधा रानी
तुम पे इतना प्यार बरसाये
Happy Birthday Maa 🎂❤️
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