खुशियों की सरगम से
जीवन के सुर सजाते

अगर तन्हा छोड़ हमें
तुम यूं दूर ना जाते।

ज़िंदगी के सफर में
होता साथ तुम्हारा 

दिल से दिलों की हम 
प्रीत सदा निभाते।

संग चलते हम तुम्हारे
इस ज़िंदगी के मेले में

फिर ठहर के दो पल कहीं
प्यार के मायने बताते।
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वो दिन थे सुहाने
जब हम थे दीवाने

सुबह सुहानी 
शाम रंगीन थी

कदमों में आसमाँ 
सर पर जमीन थी

डगमगाते थे कदम 
ज़िंदगी हसीन थी

साथ तुम होते थे
मन होता था चंचल

देख तुमको घड़ी भर
दिल में होती थी हलचल

पर अब तुम नहीं
आँखें मेरी नम है

खामोशियां हैं लफ्जों में
दिल में धड़कनें कम है

लौट आओ मेरे यार
दे दो वही पहला सा प्यार।
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देखो मुझे मैं आज भी उसी राह पर खड़ा हूँ 
जहाँ से हमारी राहें विभाजित हुई थी

कुछ अधूरे सपने लिये
कुछ टूटे ख्वाब लिये

और कुछ अनगिनत सवाल लिये।
अब भी दिल सोचता है तो थोड़ा सहम जाता है

कि क्या प्यार कभी साथ नहीं रह सकता ?
क्या वो शख्स जिस से हम बेइन्तहा मुहब्बत करते हैं

वो दो कदम साथ नहीं चल सकता है ?
बिना कुछ सोचे समझे निस्वार्थ ही

बिना कुछ पाने की लालसा लिये
बस यूँ ही कदम से कदम मिला कर

कभी सूरज की किरणों के तले
तो कभी चाँद और चान्दनी की छाँव में।

ताकी ये प्यार इक दूजे की रूह से लिपटा रहे
क्या तुम ताऊम्र के लिये मेरे नहीं हो सकते

शायद नहीं बिलकुल भी नहीं
पर मैं तुम्हारा हमेशा रहूँगा।

इस जन्म में भी और आगे भी

माना तुम साथ नहीं होंगे 

पर तुम्हारी आवाज़ तुम्हारा चेहरा
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तुमने इक बार भी नहीं सोचा
जब गये थे मुंह मोड़ कर
तन्हा मुझ को छोड़ कर।
मैं बैठा रहा घंटों उसी जगह
की तुम आओगे वापस 
पर तुमने इक बार भी नहीं सोचा।

वो गलियाँ वो चौबारा 
जहाँ होती थी मुलाकातें तुमसे
अब हुयी हैं सुनसान वो राहें मेरी
तुमने इक बार भी नहीं सोचा।

वो होली के रंग दिवाली के दिये
और अब जिन्दगी मेरी
हुयी बेरंग बुझ गयी रोशनी
तुमने इक बार भी नहीं सोचा।

वो चांदनी रातों में चाँद को ताकना
रख के तेरा सर सीने पर अपने
अब चाँद तारों तक नज़र नहीं जाती
तुमने इक बार भी नहीं सोचा।
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जो है उस में खुश रहना है
तुम्हारा भी अब ऐसा ही कुछ कहना है

दर्द लिये बैठे हैं दिल में
और अश्कों का मोती बन बहना है।

सामने खड़ी है मंज़िल पर राहें मुमकिन नहीं
हमे तो अब बस चलते ही रहना है

पावों में छाले भी होंगे इस राह ए इश्क में
अब सब हमे खुद ही सहना है।

तुमने समझाया बहुत कि
हमारा ना होगा मिलन 

दिमाग तो समझ गया पर
बोलो दिल को कैसे समझना है।

किया है वादा हम ने
खुद से भी और तुम से भी

की ता-उम्र अब हमको
तुम्हारा ही रहना है।

तुम नहीं तो जिन्दगी में
हम थोड़ा मायूस हो जायेंगे

पर तुम्हारे नाम के सहारे
पूरी जिन्दगीं जी जायेंगे।
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तुम बदल गये या हालात बदल गये
अब वो पहली सी बात नहीं रही।

वो पहली सी मुलाकात नहीं रही
वो तुम्हारी मेरी बातों में लिपटी रात नहीं रही।

याद करोगे इक दिन जब हम नज़र ना आयेंगे
मेरी बातें मेरे अल्फाज़ तुम्हे सताएंगे।

कुछ तो खूबियाँ मुझ में भी रही होंगी
जो तुम्हें हर पल अहसास मेरा करायेंगे।

माना ये सफर छोटा था तुम्हारा मेरा
मगर कुछ आधे अधुरे शब्द तुम्हारे कानों में दोहराएंगे।

तुम जितना भी मसरूफ हो जाओगे जीवन में अपने
पर हम हर पल तुम्हारी यादों से उलझे नज़र आयेंगे।
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तेरे इश्क़ पे "जाना" मैंने अपना दिल हारा है
दिल जान जिगर सब कुछ तुझ पे वारा है।

अजब सी हलचल है अब धड़कनों में मेरी 
तू ही अब मेरी हमदम यार दिलदारा है।

तेरे इश्क़ में हाल कुछ येसा है हमारा 
सर पे जमीन पावोँ में आसमाँ सारा है।

तुम्हारी ख्वाहिशें तुम्हारी जुस्तजू
और जुबाँ पे अब लफ्ज़ भी तुम्हारा है।

माना कि कुछ दीवारें है दरमियां हमारे 
पर सारी उम्र अब इन्तज़ार तुम्हारा है।
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ज़रा सी बात थी, और वो रेत से फिसल गये
देखते ही देखते रिश्ते सारे बदल गये

यूँ लगा बैठे वो ज़रा सी बात को दिल से
शाम -ए-मुहब्बत में सूरज से ढल गये

उनकी बेरुखी का आलम भी क्या बताये
माह-ए-जून में वो बर्फ से पिघल गये

मलते थे कभी गुलाल वो मेरे गालों पर
आज ज़िंदगी मेरी वो बेरंग सी कर निकल गये

ज़रा सी बात थी, और वो रेत से फिसल गये
देखते ही देखते रिश्ते सारे बदल गये
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तेरे नाम की पतंग जो आज हवा में उड़ाई है
और तेरी यादों की डोर मेरे हाथों से उलझ
आई है

तुझे तलाशता रहा मैं जमीं पर इधर उधर
पर तेरी तस्वीर पतंग के साथ-साथ आसमां
में नज़र आई है

बात नहीं होती तुझ से अब दिल मेरा मायूस
रहता है

और यादों के इन पलों में आँख मेरी भर
आई है

तू कहाँ होगी कैसी होगी सोच सोच घबराता हूँ 
अपने दिल की दास्तां आज मैने चाँद सितारों
को सुनाई है

मैं चाँद बन फलक पर उतर आऊँगा तुम
झरोखे पर आ जाना

और देखा करूँगा तुम्हें, अब बस यही उम्मीद
मैने लगाई है
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ये बेरंग हवाएं पूछे हैं
किस ओर तेरी वो प्रीत चली

टूटे टेशू के फूल से
किस ओर तेरी मनमीत चली

लिए अगन फिर विरह की
क्यों दिल में तेरी ये आंच जली

गला रूंधा हैं और आंखें नम
यादों में उसकी जब सांझ ढली

हुई अब पीड़ा नन्हे मन को
क्यों निर्मोही से तेरी ये प्रीत पली

लिए परछाई यादों में
हाय ! उस से तो तेरी प्रीत भली

किस ओर तेरी मनमीत चली......
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