मेरे बाँके बिहारी ! मुझ में कुछ ऐसा भर देना
मुझे पानी सा शीतल समन्दर सा शांत कर देना।

ना देना मुझे धन दौलत और संसार की झूठी माया
मै बस तुझको देखूँ तू मुझको देखे कुछ ऐसा कर देना।

तेरे चरणों में झुका रहे शीश फिर मेरा हरदम
अपनी मोहनी छवि से तू प्राण मेरे हर देना।

तेरा मोर मुकुट तेरा पीला पटका तेरा श्याम वर्ण 
अपनी बाँसुरी की ध्वनि मेरे रोम रोम में भर देना।

मेरे बाँके बिहारी ! मुझ में कुछ येसा भर देना
मुझे पानी सा शीतल समन्दर सा शांत कर देना।
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