प्यारा सजा दरबार मां तेरे भवन में आऊं
देखूं मूरत में तेरी चरणों में शीश झुकाऊं
लाल चुनरिया तूने हैं डाली
गालों में तेरे चमके हैं लाली
सिर पर सजाया मुकट है तेरे भवन में आऊं

प्यारा सजा दरबार मां तेरे भवन में आऊं
देखूं मूरत में तेरी चरणों में शीश झुकाऊं

आंखें तेरी लगती है प्यारी
सिंह कि तेरी है सवारी
अष्ट भुजाऐं भरी हैं तेरे भवन में आऊं

प्यारा सजा दरबार मां तेरे भवन में आऊं
देखूं मूरत में तेरी चरणों में शीश झुकाऊं

पांव में पायल तेरी बजी हैं
माथे बिंदी मां के सजी है
कानों में कुंडल सुहाये तेरे भवन में आऊं

प्यारा सजा दरबार मां तेरे भवन में आऊं
देखूं मूरत में तेरी चरणों में शीश झुकाऊं

तू हैं माता जग की जननी
बिगड़ी सब की तुझ से बननी
झोलियां भर दे सब की तेरे भवन में आऊं

प्यारा सजा दरबार मां तेरे भवन में आऊं
देखूं मूरत में तेरी चरणों में शीश झुकाऊं
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सिंह में सवार होकर
त्रिशूल हाथों में लाना

कर के सोलह श्रृंगार माँ
लाल चुनरी ओढ़ आना

लगा के केशरी टीका माथे पर
चंदन कुमकुम सी महक जाना

चलकर तू उस हिमालय से माँ
इस बार बस मुझ से मिलने आना

सजाया है मैंने दरबार तेरा
तू आ कर माँ बस विराज जाना

मै लगाऊ पंचमेवा मिश्री भोग तुझे
तू चख कर मेरी लाज बचाना

तू बसी रहना मेरी आंखों में पल पल
और मुझे सदा अपनी चरणों से लगाना
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आज मां आईं है
खुशियां संग लाई है

हो के नन्दी में सवार
मन मंदिर में उतर आईं है

सजा हुआ है तिलक माथे पे
कानों में कुंडल लगाई है

सोहना रूप मां का लगता प्यारा
एक हाथ में कमल दूजे में त्रिशूल उठाई है

हाथों में खनका के कंगन
सिर पे सोने का मुकुट सजाई है

तेरे चरणों में हुआ हूं नतमस्तक आज
मेरे सामने जो खड़ी शैलपुत्री महामाई है
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तेरे नूपुर की सुन झनकार
भई दीवानी राधा रानी

ऐसा उलझा प्रेम का धागा
जैसे कोई प्रीत पुरानी

जुवां जुवां अब सब कहे
मोहन हमरी प्रेम कहानी

तेरे नैनों के पटलों में
अब बीती जाये मेरी जवानी

मैं बनू बांसुरी तेरे प्रेम में
तू दे दे मुझको मधुर रागनी

मैं तेरे अधरों में धरूँ मुस्कान
तू बन जाना मेरे आंखों का पानी

तेरे नूपुर की सुन झनकार
भई दीवानी राधा रानी

हाँ ! मोहन हमरी प्रेम कहानी.......
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अवध आज राम जी मेरे आयो
चतुर्भुज रूप क्या खूब सुहायो

होठों से मंद मंद मुस्कायो
हाथों का तीर आंखों से चालायो

रच के श्रृष्टि सारे जग की
तु ही भव सागर पार करायो

तु ही दयाला तु ही कृपाला
कण कण में तू ही तो समायो

तेरे इशारे से चलता है जग
तु ही परम परमेश्वर कहलायो

अवध आज राम जी मेरे आयो
चतुर्भुज रूप क्या खूब सुहायो
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हर रिश्तों की आजमाईश तू चलते हुये आ गया
तु तो राम है !,खुद रच के सृष्टि खुद ही नंगे पावँ आ गया

बन के राजकुमार हुआ था प्रकट महलों में
कुछ रिश्तों के खातिर जंगलों में भटकते आ गया

होकर नतमस्तक धर लिये थे सारे कष्ट तुने
पकड़ डोर मर्यादा की कितने वचनों की लाज़ बचा गया

जो मिले फिर तुझे तुझ जैसे कष्टहारी उस पथ पर
छू कर पावँ से फिर पत्थर और पत्थर से नारी बना गया

जो दिखी तुझे भक्ति उस की जो व्याकुल थी तेरे इन्तज़ार में
खुद खाकर तूने जूठे बैर उसकी जन्मों की भूख मिटा गया

डोलता रहा तू खुद पत्थरीले पथ पर मर्यादा हाथों में लिये
बैठ काठ की नाव में उस नाविक को भव-सिंधू पार लगा गया

हर रिश्तों की आजमाईश तू चलते हुये आ गया
तु तो राम है !,खुद रच के सृष्टि खुद ही नंगे पावँ आ गया

श्री राम 💓💓
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मधुमास महीने में जो तूने दर्शन दिए हैं
देख तेरी छब को हम मनमोहित हुए हैं

सिर पे सूरज सुहाए हाथों में कमंडल उठाए
तेरी मुस्कान से मां कूष्‍मांडा भूमंडल मुस्काए

जल के अग्नि में तूने जो काया जलाई
महादेव से अपनी पावन प्रीत निभाई

हिमालय पर्वत के घर तू पार्वती बन आईं
कभी दुर्गा कभी काली कभी सती मां कहलाई

धाम की सूरज की किरणे तूने धरती पर बरसाई
तुझे मेरा बारम्बार प्रणाम हे मां माहामाई

मधुमास महीने में जो तूने दर्शन दिए हैं
देख तेरी छब को हम मनमोहित हुए हैं
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जय मां चंद्रघंटा, जय मां भवानी
तू जग की दाती मां, तू ही जग कल्याणी

दस हाथ तेरे, हर हाथ सुशोभित है
सोने सा रूप तेरा, जिस में जग मोहित है

दुष्टों का करती नाश, तू अति बलशाली है
तू जग पावन मां, तेरी सान निराली है

तेरी भक्ति में हैं शक्ति, तू अज़र अमर अभिनाशी
तेरे होने से ही खिलती धूप, तू अनमिट पूर्णमाशी

जय मां चंद्रघंटा, जय मां भवानी
तू जग की दाती मां, तू ही जग कल्याणी
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जो मैं बनूं नंद किशोर
तू बन जाना राधा सी

नित निहारू मैं तुझे
बन कर तेरा ब्रजवासी

तू आना सोलह श्रृंगार में
आंखे तेरे दर्शन की प्यासी

मेरे नाम से पहले नाम तेरा लें सब
ये सखी सहेली हरी बंसी हरी दासी

मैं लिपटा रहूं चंदन पे सर्प सा
तू ही मेरी मथुरा तू ही मेरी काशी

जो मैं बनूं नंद किशोर
तू बन जाना राधा सी
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तू मीरा सी मुहब्बत रखना
मैं श्याम सा श्यामल हो जाऊं

तू मुझे कण कण में ढूंढ़े
मैं तेरी रूह में सामिल हो जाऊं

तू जो रिझाए पल पल मुझको
मैं आठों पहर तेरे दर्शन पाऊं

तू भगवा रंग में बनी जोगन सी
मैं रंगू तुझ में और तुझ सा हो जाऊं

तू ढूंढ़े खुद को मुझ में और मैं खुद को तुझ में
तेरी वीणा से अपनी बांसुरी के सुर मिलाऊं

जुड़ी हो मेरी सांसों की डोर तेरी सांसों से
मैं जन्मोंजन्म ये भक्तिमय प्यार निभाऊं

तू मीरा सी मुहब्बत रखना
मैं श्याम सा श्यामल हो जाऊं
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