पापा आये सरहद पार से
माँ की आँखें रोई है

तिरंगे में लिपट कर तुमने
सुधबुध अपनी खोई है।

पावन हो गयी धरा मेरी
तुमने जो सीने पर गोलियाँ बोई है

माँ मेरी बेजान पड़ी है
कैसी ये बेदर्द घड़ी है।

माँग का सिन्दूर मिटा है
हाथ की चूड़ियाँ भी टूटी पड़ी हैं

माँ का तो अब हाल बुरा है
बड़ी बहन भी बिलख पड़ी है।

लगी आँखो से असुवन की झड़ी है
पर तेरी सहादत सब से बड़ी है

गर्व है मुझे तुम पर
ये लड़ाई जो तुमने लड़ी है।

मेरी धड़कनों में है खून तेरा,
फिर भी तेरी कमी
मुझे पल पल पड़ी है।
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बहा कर कतरा खून का अपना
आज वो पावन कुर्बानी हो गए
लिपट कर तिरंगे के आंचल से वो
अमर शहीद बलिदानी हो गए
लूटा दिया जान सरहद पे खुद की
खुद ही अमिट कहानी हो गए

सना कर ज़मीन को खून से अपने
वो इस रज की रजधानी हो गए

लिख दिया नाम स्वर्णिम अक्षरों से
भारत मां की तुम ऐसी निशानी हो गए

बहा कर कतरा खून का अपना
आज वो पावन कुर्बानी हो गए
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