ले लो, ले लो झूमर बिंदी और चूड़ियाँ
आके देख लो क्यौं हैं ये दूरियाँ 

पहली बार तुम्हारे गावँ में आया हूँ 
सुहाग की चूड़ियाँ तुम्हारे लिए लाया हूँ।

पाँव की है पायल कान का है झुमका
मस्त हो कर आज तुम लगाओ ठुमका।

बच्चों के लिए भी कुछ खेल खिलोने लाया हूँ 
एक बार देख लो बहुत दूर से आया हूँ। 

आज आया हूँ तुम्हारे गावँ कल जाऊँगा उस पार
तुम्हारी भोली सूरत देख सब दे दूँगा उधार।
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इस छोटे से सफर की
बस तुमसे इतनी सी जुस्तजू थी

की जब आँगन में 
धूप की किरणें पड़े 

तो सामने चेहरा तुम्हारा हो
इस छोटे से सफर की

बस तुमसे इतनी सी जुस्तजू थी
की दोपहर की धूप में

जब पावँ झुलस जाएं
तो शीतल नर्म मुलायम

साथ तुम्हारा हो
इस छोटे से डगर की

बस तुमसे इतनी सी जुस्तजू थी
की जब चाँद फलक पर आये

और ठंडी ठिठुरती हुई रात में
मेरे सिरहाने में

हाथ तुम्हारा हो 💕
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मैं बनकर हिना पिसूं पत्थर पर
तेरे हाथों से लग जाऊँ 

बन कर काजल तेरे नयनों का
तेरे आसूंओं से लिपट जाऊँ 

माँग मैं भर दूँ तेरी कुमकुम से
माथे में बिन्दीया सी सज जाऊँ 

पैरों के पायल और बिछुवे बन
हाथों में चूड़ी कंगन सा खनक जाऊँ

नाक की नथनी कानों की लटकन
बालों में गजरा सा महक जाऊँ 

बनू ओढ़नी चुनर और ढक लू तुझे
फिर मंगलसूत्र सा तेरे गले से उलझ जाऊँ 

जो देखन को तू पकड़े छननी हाथों में 
मैं स्वयं ही चाँद सा फलक पे लटक जाऊँ 

ले के हाथों में प्याला जल का
तुझे मैं पहला घूँट पिलाऊं

लम्बी उमर तो तेरी हो "जाना"
आज तेरी उमर से अपनी उमर मिलाऊ

इस करवा चौथ पर "जाना"
तुझे मैं ऐसा श्रृंगार कराऊ
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माना कि मैं इक खुबसूरत
किताब भी नहीं हूँ 

तुम मुझे रद्दी समझ कर
ही आस पास रख देना

पड़ा रहूँगा निस्वार्थ ही मैं
तुम्हारे दिल के किसी कोने में

झाड़ के धूल कभी अपने हाथों से
कुछ पन्नों को पलट देना 

मिल जायेगें तुम्हें तब कुछ अंश
मेरी यादों के उस किताब में

करना महसूस मुझे और मेरी
याद में इक आँसू गिरा देना

उस किताब में दर्ज होगी मेरी
मुहब्बत की कुछ कहानियाँ 

थोड़ी सी फ़ुरसत निकाल वो
कहानी अपने दिल को सुना देना

होंगी मुझ में ही कुछ कमियाँ
इंसान जो ठहरा 

पर दो चार ही सही कुछ
ख़ूबियाँ मेरी भी गिना देना

तुमने पूछा था कभी क्यो करते
हो इतना प्यार मुझ से ?

उस यादों की किताब में ढूंढ
कर वो जवाब खुद को दिखा देना

मैं जीवन सारा खुद का अब
कर रहा हूँ समर्पित तुझ को

दूर रह कर ही सही तुम इस
सफर का साथ निभा देना
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हम ने वादा किया है उन से
अब मिलेंगे उम्र के उस पड़ाव में

ना पुछेगा फिर कोई जाति-धर्म
और हम ना होगे किसी दबाव में

होगा चस्मा होगा आँखों में
लाठी होगी हाथों में

लडखडाहट होगी बातों में
मुस्कराहट ना होगी दांतों में

कमर होगी झुकाई सी
सूरत होगी मुरझाई सी

आँखें होंगी अलसाई सी
तब पूछेंगे तुम से हम

कितना प्यार करते हो "जाना"
उम्र की उस दहलीज में देखो 

फिर ना तुम झूठ बोल जाना
कह देना साफ साफ मुझ से

क्या पता उसी वक़्त मेरा
खत्म हो जाये ये सफ़रनामा।
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नित-नित तेरे खवाबों की
दहलीज़ पे आऊँ

भोर होने से पहले हर रोज
तेरे दर्शन पाऊँ

लिपटा रहूँ चंदन पे सर्प सा
पल पल तेरी खुशबू पाऊँ

तू बन जाना मूरत प्यार की
जब जब तुझे रिझाऊँ

ये पवित्र रिश्ता बन्धन जन्मों सा
धड़कनों में अमर कर जाऊँ

हर मंज़र पर हो विराजमान तू
मैं जहाँ देखूं बस तुझे पाऊँ

तुझ से जुड़ी हो हर पहर मेरी
तेरे नाम को सारे सुर दे जाऊँ

नित-नित तेरे खवाबों की
दहलीज़ पे आऊँ

भोर होने से पहले हर रोज
तेरे दर्शन पाऊँ।
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जिस पथ पर तू चले
मैं बन के फूल बिखर जाऊँ 

तेरे चरणों को छू कर फिर
कुछ पल जीयूॅं या मर जाऊँ 

इक बार जो तू छू ले मुझे
मैं फिर से ज्यों महक जाऊँ 

कटीले कंकड़ है राह में
मैं तेरे लिये सब सह जाऊँ

तू पथिक रहे रोशन सदा
और मैं मोम सा बह जाऊँ 

जिस पथ पर तू चले
मैं बन के फूल बिखर जाऊँ 
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ले चल परली पार प्रिये
कर दे तू उद्धार प्रिय।

उलझ गया हूँ तुझ से मैं
बेरंग लगे अब संसार प्रिय।

भटका हूँ तेरी आँखों में
मीठी नैनों की कटार प्रिय।

थाम के मेरा दामन तू
भंवर से मुझको उभार प्रिय।

लग के मेरे सीने से फिर
सम्पूर्ण कर दे मेरा प्यार प्रिये।
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लापता हूँ कब से मैं उन पलों के दरमियां
जो बिताये थे कभी साथ में।

याद है अब भी जाड़ों में वो घंटों तलक बतियाना
उस सर्द मुलायम रात में।

ये पल छिन ऋतु महीने बरखा बहार
अब भी होते हैं पर तुम नहीं होती साथ में।

लापता हूँ कब से मैं तुम्हारी उन नर्म मुलायम साँसों में
जो घोल दिये थे तुमने मेरे जज्बात में।

वो तीज त्यौहार सावन के झूले लगते हैं हर बरस
पर तुम नहीं होती हो उस सावन की बरसात में।

तुम्हारी आवाज़ गूंजती है अब भी मेरे कानों में
और मैं लापता हूँ कब से तुम्हारे उन्हीं ख्यालात में।
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सौ जन्मो का साथ अपना
साँस का धड़कन के जैसे

आस का जीवन के जैसे
बादल का गगन के जैसे।

थामो तुम हाथ अपना
श्याम की जोगन के जैसे

हाथ में कंगन के जैसे
प्यास में सावन के जैसे।

सौ जन्मो का साथ अपना
रूप का दर्पन के जैसे

भक्त को भगवान के जैसे
मंत्र का हवन के जैसे।

खुशबू का मधुबन के जैसे।
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मैं मेरी कविताओं सा सरल हो जाऊँ
तू फिर पढ़े और मैं समझ आ जाऊँ।

मेरा हर इक लफ्ज़ छू जाये तुझे
और मेरी कविताओं में तेरा अक्श नज़र आये तुझे।

मैं तुझे वर्णमाला समझ अपनी कविताओं में पिरोता रहूँ
तेरे नाम को मोतियोँ की माला समझ फिरोता रहूँ।

मै खुद की कलम हूँ और तू कलम की स्याही है
तुझ बिन मेरा चलना अब दो कदम भी क्या ही है।

मै आज हूँ सायद कल चला जाऊँ संसार से
पर मेरी कविताओं में तू रहेगी हमेशा प्यार से।

जो किया है वादा मुझ से उसे तुम निभा देना
अगर याद आऊँ मैं,अपने मन को मेरी कविता सुना देना।

मैं मेरी कविताओं सा सरल हो जाऊँ
तू फिर पढ़े और मैं समझ आ जाऊँ।
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मैं तप्ता हुआ मरुस्थल हूँ जाना
तू ठंडी छाँव छबीली है

मैं कौवे सा कर्कश हूँ जाना
तू कोयल कोई सुरीली है

मैं बंजर सा जमीं हूँ जाना
तू लहराती सरसों पीली है

मैं घनघोर सा अंधेरा हूँ जाना
तू चमकीली किरण उजली है

मैं समंदर सा खारा हूँ जाना
तू लहरों सी अलबेली है

मैं तप्ता हुआ मरुस्थल हूँ जाना
तू ठंडी छाँव छबीली है
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पास आजा यार
गले से लग जा यार

दिल करने लगा तेरी फ़रमाइश
तू इस में समा जा यार।

तेरी मीठी बातों में दिल घुलने लगा
तू दो-चार लफ्ज़ सुना जा यार

अब दिन ना मेरा तेरे बिन ढलता है
तू मेरी शामों को महका जा यार।

लिपटा रहूँ तेरे जिस्म से
तू अपने जिस्म ए अर्क में
डुबो जा यार।
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मैं टूटता हुआ तारा बन जाऊँ 
तुम खुद की मन्नत सी बन जाना।

मैं खँडहर सी इक दीवार बन जाऊँ 
तुम खुद की जन्नत सी बन जाना।

मैं सूखा हुआ पेड़ बन जाऊँ
तुम बसंत बहार सी बन जाना।

मैं जलती हुयी बदरा बन जाऊँ
तुम सावन की फुहार सी बन जाना।

मैं सूखा हुआ कुआँ बन जाऊँ
तुम लहराती दरिया सी बन जाना।

मैं नीम सा कड़वा बन जाऊँ
तुम चंदन सी महक जाना।
मैं नागफनी सा कटीला बन जाऊँ
तुम छुई-मुई सी बन जाना।

मैं घोर रात अमावस की बन जाऊँ
तुम चांदनी रात सी चमक जाना।
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झूमर बन
बालों में लटकता रहूँगा

बिंदिया बन 
माथे में चमकता रहूँगा

काज़ल बन
आँखो में सजता रहूँगा

झुमका बन
कानों को चूमता रहूँगा

नथनी बन
गरूर तेरा बनता रहूँगा

लाली बन
होठों को रंगता रहूँगा

मंगलसूत्र बन
सीने की धड़कन सुनता रहूँगा
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मेरे हमसफ़र आओ
इस चांदनी रात में
चलते हैं ख्वाबों की दुनिया में
दे दो हाथ अपना मेरे हाथ में
ए खुदा अब ये रात 
और थोड़ी लम्बी कर दो।
मेरे यार को तुम 
मेरी बाहों में भर दो
ये चाँद सितारे जुग्नू सब
मेरे प्यार के नाम कर दो।
वो टूटता हुआ तारा
मेरी दुआओं का असर
मेरे हाथ में प्यार की लकीरें 
और भी गहरी कर दो।
मेरे हमसफ़र आओ
मेरी धड़कनो में समा जाओ
फिर ये धागे प्यार के खुल ना पाये
तुम मुझ से इस क़दर उलझ जाओ
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हम कल फिर मिलेंगे यहीं
जरा जल्दी आना तुम
जरा लम्बा ठहरना तुम
करनी हो तुम्हें जरुरी बात।
जरा हौले से कहना तुम
रखनी हो अधूरी बात
जरा कौने में रखना तुम

जहाँ मिले थे कभी चुपके से
वहाँ चुपके से आना तुम।
जहाँ हुई थी मुहब्बत कभी
फिर अपनी मुहब्बत दिखना तुम

गुनगुनी धूप महकती फुलवरियां
फ़ूलों संग पत्तियों सी आना तुम।
चांदनी रात तारों की पलक पर
और मेरे दरीचों में उतर आना तुम

हम कल फिर मिलेंगे यहीं
जरा जल्दी आना तुम।
जरा लम्बा ठहरना तुम।
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जाके मंदिर तुम मन्नत का धागा बाँध आना
कर के अरदास तुम साथ दोनों का मांग आना।

चन्दन की खुशबू सा महका रहे प्यार अपना
एक दिया तुम दौनों के नाम का जला आना।

जो लटकी होगी घंटी मंदिर में
उसे अपने हाथों से बजा आना।

बेलपत्र, पंचामृत, पंचमेवा का भोग
दोनों के नाम का लगा आना।

जलते हुये हवन कुंड की ले कर परिक्रमा
मेरे प्यार का कलावा तुम अपने हाथ में बाँध लाना।

शिव पार्वती, सीता राम सा हो जीवन का साथ
अपना लेकर हाथ में गंगा जल साथ रहने की

वो सारी कसमें उठा लाना।
जाके मंदिर तुम मन्नत का धागा बाँध आना

कर के अरदास तुम साथ दोनों का मांग आना।
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मैं होता महज़ शून्य सा
तू पहली वो इकाई होती

जुड़ कर मुझ से फ़िर तू
बनी दहाई होती या होती

तू वर्णमाला का पहला अक्षर
तूझ से ही मेरी पढ़ाई होती

मैं लफ्ज़ लफ्ज़ दोहराता तुझको
तू मानों जैसे रब की रुबाई होती

रट लेता तुझे किसी पहाड़ा सा
या तू मेरे हाथों की लिखाई होती

गिनती तेरी होती मेरी साँसों में
जब तेरी सांस से मेरी सांस टकराई होती
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तू आना मैं भी आऊंगा
उस ठंडे शीतल झील किनारे

ठहरे हुए उस ताल पे तब
हां ! दिख जाएंगे अक्श हमारे

जुबां चुप होगी दोनों की
आंखों से निकलेंगे बोल सारे

सुध-बुध खोए फिर बैठेंगे
उस ठंडे शीतल झील किनारे

शफ़क़ उजली उजली सी
झिलमिल होंगे सब चांद तारे

लिए मुहब्बत चश्म में
फिर इक दूजे को हम निहारे

तू आना मैं भी आऊंगा
उस ठंडे शीतल झील किनारे
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